ऑक्सीटोसिन हार्मोन का दुधारू पशुओं में प्रभाव
Modern Kheti - Hindi|15th Nov 2020
ऑक्सीटोसिन हार्मोन को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा आवश्यक ड्रग सूची में शामिल किया गया है। ऑक्सीटोसिन पशुओं की ल्योटी में दूध उतारने की अदभुत क्षमता रखता है। ऑक्सीटोसिन के प्रयोग को लेकर पशुपालकों में बहुत सारी भ्रातियां हैं।
रीतू रानी, सुरेंद्र कुमार एवं संजय यादव

ऑक्सीटोसिन हार्मोन बच्चे के जन्म व जेर गिराने में मदद करने के साथसाथ एक अति आवश्यक दूध उतेक्षेपक हार्मोन भी है जो मुख्यतः अंत: ग्रंथी और गर्भाशय से निकलता है। इसी कारण ऑक्सीटोसिन हार्मोन को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा आवश्यक ड्रग सूची में शामिल किया गया है। ऑक्सीटोसिन पशुओं की ल्योटी में दूध उतारने की अदभुत क्षमता रखता है। ऑक्सीटोसिन के प्रयोग को लेकर पशुपालकों में बहुत सारी भ्रातियां हैं। इनमें पशुओं के स्वास्थ्य में होने वाले दुष्प्रभाव तथा साथ ही मनुष्यों में ऑक्सीटोसिन के प्रयोग द्वारा प्राप्त दूध के उपभोग से होने वाले तथाकथित दुष्प्रभाव सम्मिलित हैं जिनको तुरंत हल करने की आवश्यकता है। दूध ल्योटी में बनता है और दोहन तक ल्योटी में ही रहता है। ल्योटी में दूध को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है, जो हिस्सा थन और बड़ी दुग्ध वाहिनियों में मिलता है उसे सिस्टर्न दूध कहते हैं तथा जो हिस्सा छोटी वाहिनियों और कोष्ठक में होता है उसे कोष्ठक दूध कहते हैं। सिस्टर्न दूध आसानी से ल्योटी से निकल आता है पर कोष्ठक दूध का ल्योटी से निकालना इसलिए जरूरी होता है, क्योंकि अर इस दूध की ल्योटी से न निकाला जाए तो यह ल्योटी में दबाव बनाकर दूध निर्माण की प्रक्रिया को बाधित करता है।

इसके अतिरिक्त ल्योटी में बचे हुए दूध में संक्रमण को रोकने के लिए भी इस दूध का निकालना बहुत ही जरूरी है। कुछ क्रियाएं जैसे बच्चे द्वारा स्तनपान, ल्योटी का धोना व मालिश करना या सहलाना अथवा दूध निकलने से पहले बछड़े को दिखाने पर ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्राव पीयुषिका ग्रंथी के पिछले भाग से होता है। ल्योटी के अंदर पार्श्व संवेदी तंत्रिकाएं होती है जो थन चूसने पर या दोहने पर इन आवेगों को मेरूज्जा से ले जाकर पश्च-पीयुषिका तक पहुंचती है। पीयुषिका में ऑक्सीटोसिन हार्मोन का निर्माण होता है, जहां से यह रक्त द्वारा थन की ग्रंथियों में पहुंचता है और कोष्ठक को संकुचित कर दूध निष्कासन करता है।

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