महिलाओं हेतु कम श्रम में अधिक कार्यक्षमता चुनौतियां एवं संभावनाएं
Modern Kheti - Hindi|15th Nov 2020
कृषि यंत्र एवं तकनीकी लिंग विशिष्ट डोमेन को लक्षित नहीं कर सके हैं और इस क्षेत्र में लैंगिक मुद्दों पर बहुत कम ध्यान दिया गया है। महिलाओं की उनके अलग-अलग शारीरिक और एग्रोनोमिक्स भिन्नताओं के कारण पुरुषों की तुलना में अलग-अलग मशीनीकरण एवं तकनीकी आवश्यकताएं हैं।

पिछले कई दशकों से कृषि में जोखिमों की अधिकता के कारण कृषि व्यवसाय को खतरनाक व्यवसाय की श्रेणी में रखा गया है। प्रायः यह देखा गया है कि विभिन्न कृषिरत कार्यों में अधिक समय तक झुककर कार्य करने, नीचे बैठ कर कार्य करने, अत्याधिक भार उठाने पर अनेक प्रकार के अस्थि मज्जा विकास जैसे पीठ व गर्दन के विकार, तंत्रिका तंत्र में दबाव, सिंड्रोम, टेनोसिनोवाइटिस, एपिकॉन्डलाइटिस उत्पन्न होते हैं। कृषि में भारी शारीरिक कार्य, अपर्याप्त तरीके, कार्य करने की गलत तकनीक, उपकरणों की अनुपलब्धता, न केवल अनावश्यक थकान और व्यावसायिक दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं अपितु कार्यक्षमता भी कम करते हैं। उपरोक्त कारणों से कृषकों, मुख्यतः महिलाओं में अस्थि मज्जा विकारों के विकास का विशेष खतरा होता है। भारत के ग्रामीण इलाकों में प्रायः कृषि विकास कार्यक्रमों में महिलाओं की सहभागिता नगण्य होती है। अधिकतर कृषि से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों की भागीदारी अधिक पाई गई है। क्योंकि अधिकतर तकनीकी उपकरणों के विकास में महिलाओं के शारीरिक बनावट का ध्यान ही नहीं रखा गया है अतः ये कम उपयोगी एवं अनुकूल हैं । बदलते पर्यावरण, गलत या अपरियाप्त कृषि उपकरणों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं मांसपेशियों संबंधी विकार और शारीरिक तनाव का अनुभव करती हैं।

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नये कृषि कानूनों की संवैधानिकता

केन्द्रीय सरकार ने कृषि से संबंधित तीन आर्डीनस राष्ट्रपति से जारी करवा दिये। बाद में इनकी जगह तीन नये कानून बना दिये। इन कानूनों का विरोध विश्व में सबसे बड़े आंदोलन का रुप धारण कर गया है। केन्द्रीय सरकार की ओर से इन कानूनों को बड़े कृषि सुधारों की ओर से प्रचार किया जा रहा है। सरकार का पक्ष है कि इन कानूनों के फलस्वरुप कृषि में बहुत प्रगति होगी और किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होगी।

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अमरूद के रोग एवं उनकी रोकथाम

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मेथी में पौध संरक्षण

बीजीय मसालों में मेथी का एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसकी हरी व सूखी पत्तियां सब्जी बनाने के लिए प्रयोग की जाती है। इसके बीज सब्जी व आचार में मसाले के रूप में प्रयोग किये जाते हैं।

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प्रमाणित बीज कृषक आय दोगुनी करने की नई विद्या

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प्याज व लहसुन में कीट और रोग प्रबंधन

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इसका देश पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा, जहां अधिकांश डेयरी किसान या तो भूमिहीन हैं या सीमांत भूमिधारक हैं और उनके लिए दूध सबसे सस्ते प्रोटीन स्रोत में से एक है।

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1st February 2021

कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का गठन हो

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था अगले आदेश तक जारी रहेगी। जय जवान जय किसान' को साकार रूप देने वाले लाल बहादुर शास्त्री ने 55 वर्ष पहले न्यूनतम समर्थन मूल्य की शुरूआत की थी। इन कानूनों में एम.एस.पी. का कोई जिक्र नहीं होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश में इसे लागू करने का आदेश देकर जजों ने बर्र के छत्ते को छेड़ा है।

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