चैनलों की भक्ति गायब किसान के मुद्दे
Farm and Food|September Second 2021
देशभर में आंदोलन कर रहे किसान यह शिकायत करते हैं कि मीडिया के लोग किसानों की बात जनता के सामने लाने में खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. ज्यादातर न्यूज चैनल हमेशा की तरह सरकार की पीठ थपथपाने और उस की चाटुकारिता में लगे हैं. इसी बात की पड़ताल के लिए हमारी टीम ने 9 सितंबर के प्राइम टाइम में कुछ हिंदी चैनलों पर अपनी नजर बना कर रखी थी, जो इस तरह थी:
फार्म एन फूड टीम

इंडिया टीवी

रात 8 बजे 'हकीकत क्या है' के तहत कुछ विषयों को लिया गया, जिन में सब से पहले 13 वें ब्रिक्स समिट की बात की गई. ब्रिक्स समिट की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई और इस बहाने 15-20 मिनट तक उन का भरपूर गुणगान किया गया.

इस के बाद बाराबंकी, उत्तर प्रदेश में असदुद्दीन ओवैसी की रैली को ले कर रिपोर्ट दिखाई गई. इस रिपोर्ट को भी जरूरत से ज्यादा कवरेज दी गई.

इस के बाद गणेश चतुर्थी के नाम पर लोगों के धार्मिक उन्माद और इस के पीछे भाजपा विधायक नीतीश राणा और महाराष्ट्र के के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की चूहेबिल्ली सी लड़ाई से जुड़ी एक रिपोर्ट भी दिखाई गई.

इस के बाद सुपर फास्ट 100 न्यूज दिखाई गईं. इस में हर तरह के समाचार लिए गए थे, मगर एंकर की आवाज 'राजधानी एक्सप्रेस' से भी तेज थी, जिस की वजह से ज्यादातर समाचार जब तक समझने की कोशिश की जाती, तब तक अगला समाचार आ जाता.

प्राइम टाइम यानी रात 9 बजे 'आज की बात रजत शर्मा के साथ' की शुरुआत हुई. उन के बोलने का अंदाज ऐसा होता है, जैसे कितनी बड़ी बात बता रहे हों, मगर बात उतनी बड़ी होती नहीं है. बाड़मेर हाईवे पर यानी पाकिस्तान से 40 किलोमीटर दूर कैसे जैगुआर और हरक्यूलिस विमान उतारे गए, इस विषय को बहुत लंबा खींचा गया और नितिन गडकरी का ऐक्सक्लूसिव इंटरव्यू भी लिया गया, जबकि ऐसे मुद्दों में जनता की खास दिलचस्पी नहीं होती.

इस के बाद एक रिपोर्ट पाकिस्तान के बाजार में अमेरिकी हथियार की खुलेआम बिक्री पर हुई और फिर तालिबानी फरमान से संबंधित वह रिपोर्ट दिखाई गई, जिस में महिलाओं के खेलनेकूदने पर प्रतिबंध लगाए गए हैं.

अंत में प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश जाने की बात और राहुल गांधी का वैष्णो देवी के दरबार में जाने के समाचार को विस्तार से बताया गया. ऐसे समाचारों का आम जनता से कोई सरोकार नहीं होता.

एनडीटीवी

रात 8 बजे इस चैनल ने ब्रिक्स पर बहस दिखाना शुरू किया तो ऐसा लगा कि दूसरे और इस चैनल में बहुत ज्यादा फर्क नहीं है, क्योंकि सभी इस विषय पर दिखा रहे थे, लेकिन फर्क यह था कि यहां नरेंद्र मोदी की तारीफ नहीं बल्कि 5 देशों की अलगअलग भूमिकाओं पर फोकस किया जा रहा था.

9 बजे के प्राइम टाइम में किसानों को जगह देना अपनी जिम्मेदारी समझा. करनाल में किसान कैसे क्या कर रहे हैं, यह विस्तार से दिखाया गया. हरियाणा सरकार द्वारा गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने पर किसानों की राय भी दिखाई गई, जिस का सार यह था कि इस से किसानों को कोई फायदा नहीं होने वाला.

घायल किसान महेंद्र पुनिया को किसान कैसे चंदा इकट्ठा कर के मदद दे रहे हैं, यह भी उल्लेखनीय बात थी. साथ ही, यह भी बताया गया कि कैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना फिसड्डी और केवल बीमा कंपनियों को मुनाफा देने वाली साबित हो रही है.

न्यूज नेशन और टीवी 9

खबरिया चैनल टीवी 9 पर रात के 8 बजे पड़ोसी देश अफगानिस्तान में तालिबान के मुद्दे पर खास कार्यक्रम दिखाया गया. यह आधा घंटे का प्रोग्राम था. इस प्रोग्राम में ज्यादातर उन वीडियो के बारे में बातचीत की गई थी, जो जनता बहुत बार देख चुकी है. चीन, पाकिस्तान और भारत के नजरिए से एक रिपोर्ट पेश की गई थी, जिस में सटीक जानकारी के बजाय सनसनी ज्यादा थी. रिपोर्टर का ऊंची और तेज आवाज में बदहवास हो कर बोलना खल रहा था.

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