कश्मीर में कैसर मुनाफा और मजबूरियां
Farm and Food|July Second 2021
कश्मीर को अगर प्राकृतिक सुंदरता के लिए 'धरती का स्वर्ग' कहा जाता है, तो इसी कश्मीर को पूरी दुनिया में केसर की उम्दा खेती के लिए भी जाना जाता है. यही वजह है कि आज कश्मीर के केसर की मांग भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बढ़ती जा रही है.
सरोज बाला

केसर दुनिया का सब से महंगा मसाला है. इंटरनैशनल मार्केट में कश्मीरी केसर को जीआई टैग दिया गया है. इस की कीमत की बात करें, तो साल 2020 में 100 ग्राम केसर की कीमत 30,000 रुपए थी और 50 ग्राम की कीमत 17,000 रुपए थी.

कश्मीर में केसर की खेती पंपोर से सटे गांव जेवन, लैथपौरा, बालहामा और किश्तवाड़ जिले के कुछ हिस्सों में की जाती है. ये क्षेत्र श्रीनगर के आसपास ही हैं और बिलकुल मैदानी क्षेत्र हैं.

श्रीनगर के नैशनल हाईवे के दोनों तरफ केसर की खेती होती है. केसर के पौधों पर फूल आने पर चारों ओर खुशबू बिखर जाती है, जो दुनिया के किसी भी केसर के फूलों से नहीं आती है. यही वजह है कि इस के पौधे यहां आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र होते हैं.

पंपोर से सटे गांव जेवन, लैथपौरा, बालहामा और किश्तवाड़ जिले के कुछ हिस्से की जमीन बहुत ही ऊपजाऊ है. यहां की मिट्टी इतनी ज्यादा ऊपजाऊ है कि इस में कोई भी देशी या दूसरी खाद मिलाने की जरूरत नहीं होती है. यहां की मिट्टी को दोमट मिट्टी भी कहा जाता है. कश्मीर के इसी हिस्से की मिट्टी में केसर उगाया जाता है.

केसर के लिए इस इलाके की जलवायु भी बहुत ही अनुकूल होती है, क्योंकि मैदानी क्षेत्र होने के कारण यहां बर्फीली हवाएं कम चलती हैं. बर्फ भी कम पड़ती है. अगर बर्फ पड़ भी जाए तो आसानी से पिघल जाती है और धूप भी पौधों पर अच्छी पड़ती है, जो केसर के लिए सब से जरूरी मानी जाती है.

केसर की खेती के लिए सब से पहले हाथों से जमीन की खुदाई की जाती है. हाथ से जमीन खोदने की वजह यह भी है कि यह कहींकहीं से टेढ़ीमेढ़ी होती है. छोटेछोटे कंकड़पत्थरों को खोज कर निकाला जाता है और घास को भी साफ किया जाता है.

जमीन की खुदाई के बाद नरम होने के लिए 8-10 दिन के लिए छोड़ दिया जाता है, फिर खुलेखुले खेतों में लंबीलंबी क्यारियां बनाई जाती हैं. बीच में तंग नालियां बनाई जाती हैं. फिर इन क्यारियों में केसर की गांठ यानी बल्ब लगाए जाते हैं.

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