अगस्त माह में करें खेती से जुड़े काम
Farm and Food|August First 2021
हमारे यहां खेती के नजरिए से किसानों के लिए वैसे तो हर महीना खास होता है, लेकिन अगस्त का महीना, जिसे हम हिंदी महीने के रूप में श्रावण और भाद्रपद के नाम से जानते हैं, खेती के लिए इसलिए ज्यादा अहम होता है कि इस महीने में मानसून जोरों पर होता है और वर्षा वाले क्षेत्रों में झमाझम बारिश भी होती है. यह भी कह सकते हैं कि मानसून बरसात की झड़ी लगा देता है, जिस के चलते चारों तरफ हरियाली बढ़ जाती है.
बृहस्पति कुमार पांडेय

अगस्त महीने में होने वाली बारिश जहां फसलों के लिए फायदेमंद होती है, वहीं कई तरह के कीड़ेमकोड़े भी पनपते रहते हैं, जो फसल और पशुओं के साथसाथ हमारी सेहत के लिए भी नुकसानदायक होते हैं.

इस महीने ज्यादा मच्छर पनपने से मलेरिया व डेंगू जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ता है. साथ ही, पशुओं में खुरपकामुंहपका रोग का प्रकोप भी बढ़ जाता है. वहीं अधिक बारिश से फसलों में भी कीटों व बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है.

इस समय बारिश अधिक होने से फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों की तादाद काफी बढ़ जाती है, जो बोई गई फसल की पत्तियों का रस, फूल व फलों को अपना भोजन बनाते हैं. इस से पैदावार में काफी कमी आ जाती है. ऐसे में अगर कीटों का प्रकोप फसल में दिखाई पड़े, तो अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा विशेषज्ञ से संपर्क कर समाधान पा सकते हैं.

इस के अलावा फसल में बहुत सी बीमारियां भी फैलती हैं, जिस से उपज में कमी के साथसाथ गुणवत्ता भी गिर जाती है. इन बीमारियों से बचने के लिए किसानों को रोगरोधी किस्मों का चयन और बीजोपचार का उपाय अपनाना चाहिए. बीमारी का प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें.

अगस्त के महीने में हमारे खेतों में बोई गई फसल के बीच और मेंड़ों पर घासफूस उग आते हैं, जो फसल की वृद्धि की दर को रोक देते हैं, जिस से फसल का उत्पादन प्रभावित हो जाता है.

ऐसे में यह सुनिश्चित कर लें कि फसल में खरपतवार बिलकुल ही न उगने पाएं, अगर खरपतवार उग आए हों, तो निराईगुड़ाई कर के उन्हें फसल से निकाल दें. इन खरपतवारों के नियंत्रण से कीट और बीमारियों की रोकथाम में भी मदद मिलती है.

इस समय यह भी ध्यान दें कि फसल में कोई रोगग्रस्त पौधा दिखाई दे, तो उसे निकाल कर नष्ट कर दें. इस से बीमारियों को पूरी फसल में फैलने से रोकने में मदद मिलती है.

किसान खरीफ फसल के रूप में सब से ज्यादा धान की खेती करते हैं और अगस्त महीने तक धान की रोपाई का काम पूरी तरह से पूरा हो चुका होता है. ऐसे में धान की फसल को पानी की ज्यादा जरूरत पड़ती है.

अगस्त महीने में बारिश अच्छी होती है. ऐसी अवस्था में खेतों के चारों ओर मेंड़ों को मजबूत करें, जिस से बरसात का पानी खेत से बह कर बाहर न जाने पाए.

अगर अगस्त महीने में बारिश अच्छी न हो, तो फसल में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए उचित अंतराल पर सिंचाई करते रहें.

धान की रोपाई के 25-30 दिन बाद अधिक उपज वाली प्रजातियों में प्रति हेक्टेयर 30 किलोग्राम नाइट्रोजन यानी 65 किलोग्राम यूरिया और सुगंधित प्रजातियों में प्रति हेक्टेयर 15 किलोग्राम नाइट्रोजन यानी 33 किलोग्राम यूरिया की टौप ड्रेसिंग करें. नाइट्रोजन की इतनी ही मात्रा की दूसरी व अंतिम टौप ड्रेसिंग रोपाई के 50-55 दिन बाद करनी चाहिए.

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