सब्जी का बीज ऐसे करें तैयार
Farm and Food|June Second 2020
बीज एक छोटी जीवित संरचना है, जिस में पौधा ऊतकों की कई परतों से ढका हुआ नींद में रहता है और जो सही माहौल जैसे नमी, ताप, हवा और रोशनी व मिट्टी के संपर्क से नए पौधों के रूप में विकसित हो जाता है. भारत में किसान परिवारों की संख्या बहुत सारे पश्चिमी देशों की कुल जनसंख्या से भी ज्यादा है. ऐसे में किसानों को अधिक पैदावार के लिए अच्छी क्वालिटी वाले बीज सही मात्रा में सही समय पर सही कीमतों के साथ मुहैया कराना जरूरी है.

कुछ सब्जियां, जिन का इस्तेमाल किचन गार्डन के रूप में भी किया जाता है, जैसे टमाटर, बैगन, मिर्च, मटर, मूली, चुकंदर, लहसुन, प्याज, मेथी, चौलाई, पत्ता गोभी, फूल गोभी, भिंडी वगैरह के बीज उत्पादन की तकनीक व उन की क्वालिटी के बारे में वैज्ञानिक तरीके यहां बताए जा रहे हैं:

प्याज

प्याज में परागण कीटों द्वारा होता है. बीज के लिए यह 2 साला फसल है. प्याज की सभी किस्मों का बीज मैदानी इलाकों में तैयार किया जा सकता है. बीज उत्पादन के लिए 2 विधियां हैं:

बीज से बीज : इस विधि में बल्बों का उत्पादन सामान्य तरीके से ही करते हैं. इस तकनीक का इस्तेमाल उन किस्मों के लिए करते हैं, जिन का अच्छी तरह भंडारण नहीं किया जा सकता यानी बीजों का इस्तेमाल उसी साल करना होता है.

बीज की बोआई अगस्त महीने में करते हैं और प्रतिरोपण सितंबर माह में किया जाता है. बल्बों में फरवरी में फूल आ जाते हैं और बीज बनते हैं. इस विधि में बीज के लिए बल्बों का चुनाव नहीं करते हैं. इसी कारण बीज प्रचुर मात्रा में होता है, परंतु क्वालिटी अच्छी नहीं होती है.

बल्ब से बीज : इस विधि में पिछले मौसम में हासिल बल्बों को खेत में लगाते हैं. बीज के लिए स्वस्थ, चमकदार, मध्यम आकार के बल्बों का चुनाव करते हैं. 7-9 सैंटीमीटर व्यास और 50-60 ग्राम औसत वजन वाले बल्बों को 30 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाते हैं. स्वस्थ व औसत वजन वाले बल्ब लगाने से उपज में बढ़वार होती है. बल्बों को लगाते समय लाइन से लाइन व पौधों से पौधों की दूरी 45x30 सैंटीमीटर रखते हैं.

बल्बों को 45 सैंटीमीटर चौड़ी मेंड़ बना कर बोआई करना सही होता है. बोआई के 3 महीने बाद फूल आ जाते हैं और 6 हफ्ते बाद बीज पक कर तैयार हो जाते हैं. फूल एकसाथ पक कर तैयार नहीं होते हैं. पके बीज फूल से छिटक कर जमीन पर गिर जाते हैं. इसलिए तैयार बीज छिटकने से पहले फूल को काट लेते हैं.

इस तरह की कटाई 4 बार की कटाई के बाद खत्म हो पाती है. पके पुष्प गुच्छ को बीज छत्रक भी कहते हैं. बीज छत्रकों को कटाई के बाद हवादार व छायादार जगह पर सुखा लेते हैं. अच्छी तरह सूख जाने के बाद छत्रकों से बीज अलग कर देते हैं. बीजों को साफ कर के अच्छी तरह सुखा लेते हैं.

टमाटर

बीज के लिए टमाटर की खेती उसी तरह से होती है, जिस तरह सब्जी के लिए करते हैं. टमाटर स्वपरागित पौधा होते हुए भी इस में 30-40 फीसदी तक परपरागण पाया जाता है.इस कारण बीज तैयार करते समय 2 किस्मों के बीजों की दूरी 50 से 100 मीटर रखते हैं. बीज के लिए स्वस्थ पौधे का चुनाव करते हैं और पूरी तरह से पक जाने के बाद बीज के लिए फल को तोड़ते हैं. फल तोड़ने के बाद 2 तरीकों से बीज को अलग करते हैं:

किण्वन विधि : इस विधि का इस्तेमाल छोटेछोटे फलों, जिन में ज्यादा बीज होते हैं, के लिए किया जाता है. इस में टमाटर के गुच्छे को मिट्टी या लकड़ी के बरतन में 1-2 दिनों के लिए रख देते हैं.

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