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तुम संसार में किसलिए आये हो ?
Rishi Prasad Hindi
|May 2023
एक होता है कर्म का बल । जैसे मैं किसी वस्तु को ऊपर फेंकूँ तो मेरे फेंकने का जोर जितना होगा उतना ऊपर वह जायेगी फिर जोर का प्रभाव खत्म होते ही नीचे गिरेगी । गेंद को, पत्थर को ऊपर फेंकने में आपमें जितना कर्म का बल है उतना वे ऊपर जायेंगे फिर बल पूरा हुआ तो गिरेंगे । ऐसे ही कर्म के बल से जो चीज मिलती है वह कर्म का बल निर्बल होने पर छूट जाती है।
दूसरा होता है भाव का बल । जितनी देर भाव से भगवान के श्रीचित्र को देखा उतनी देर भावसमाधि लगी अथवा भाव से भगवान प्रकट हुए, उनसे वार्तालाप हुआ; यह दूसरे को नहीं दिखेगा। लेकिन भाव बदला तो भगवान अंतर्धान हो जायेंगे।
(१) कर्म का बल
(२) भाव का बल
(३) वास्तविक स्थिति
तीसरी होती है
Denne historien er fra May 2023-utgaven av Rishi Prasad Hindi.
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