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अमरनाथ यात्रा में होने वाली आपदाओं के कारण वास्तुदोष!
Jyotish Sagar
|August 2022
सरकार को चाहिये कि तीर्थयात्रियों के लिए लगने वाले तम्बू, पाण्डाल, इत्यादि अमरनाथ गुफा के नैर्ऋत्य कोण में न लगायें, ताकि तीर्थयात्री अधिक सुरक्षित रह सकें।
जम्मू-कश्मीर की लिहर घाटी में स्थित हिन्दुओं का पवित्र तीर्थस्थल अमरनाथ एक प्रसिद्ध गुफा मन्दिर है। लिहर घाटी स्थित यह गुफा, ग्लेशियरों और बर्फीले पहाड़ों से घिरी हुई है जोकि वर्ष के अधिकांश समय बर्फ से ढँकी रहती है। यहाँ की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से बने प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबन्धन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों लोग यहाँ आते हैं। अमरनाथ जम्मू-कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में लगभग 140 किलोमीटर दूर समुद्र तल से 13,600 फुट की ऊँचाई पर स्थित है। अमरनाथ गुफा भगवान् शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को 'तीर्थों का तीर्थ' कहा जाता है, क्योंकि यहीं पर भगवान शिव ने माँ पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था।
अमरनाथ यात्रा एक वार्षिक तीर्थ स्थल बन गया है, जिसकी यात्रा बालटाल और पहलगाम दोनों रूट पर आधार शिविरों से प्रारम्भ होती है। अमरनाथ यात्रा की चढ़ाई काफी कठिन और मुश्किलों से भरी होती है, लेकिन अमरनाथ की पवित्र गुफा में पहुँचते ही सफर की सारी थकान पल भर में छू-मन्तर हो जाती है और अद्भुत आत्मिक आनन्द की अनुभूति होती है। अमरनाथ यात्रा के पूरे रास्ते में, तीर्थयात्रियों के लिए भारत के विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों एवं भक्तों द्वारा विभिन्न प्रकार की सुविधाएँ, जैसे- भोजन, चाय, पानी, फलफ्रूट, दवाइयाँ इत्यादि की आपूर्ति की जाती है और विश्राम के लिए तम्बू लगाए जाते हैं। तीर्थयात्रियों के लिए यह सभी सुविधाएँ भक्तों द्वारा मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती हैं।
This story is from the August 2022 edition of Jyotish Sagar.
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