कैसे पकडे झूठ
Grihshobha - Hindi|June Second 2020
कैसे पकडे झूठ
सामने वाला सच बोल रहा या झूठ यह जानने के लिए यह जानकारी आप के बड़े काम आएगी...
गरिमा पंकज

शाम 7 बजे प्रिया जैसे ही घर में घुसी उस ही घर में घुसी उस की भाभी नताशा सामने खड़ी हो गई. प्रिया नजरें चुराती हुई अंदर जाने लगी, तो नताशा ने टोका,

'ननदजी, जरा यह तो बताइए कि इतनी देर तक आप कहां थीं?"

'भाभी, मैं वह... ऐक्चुअली मैं... हमारी ऐक्स्ट्रा क्लास थी.

अच्छा, किस विषय की?"

"भाभी... वह... फिजिक्स की निभा मैम हैं न, उन्होंने कहा था कि आज शाम को ऐक्स्ट्रा क्लास लेंगी, तो सारी लड़कियां क्लास में चली गई थीं."

मगर तुम्हारी सहेली तो कुछ और ही कह रही थी?"

प्रिया पर नजरें जमाए नताशा ने पूछा तो प्रिया हड़बड़ा गई. सच उस की जबान पर आ गया. “जी भाभी, मैं अपनी फ्रैंड के साथ बर्थडे पार्टी में गई थी. रजनी का बर्थडे था. वही हमें जिद कर के मौल ले गई थी.

"प्रिया, तुम मौल गई या बर्थडे पार्टी में शामिल हुई या कुछ और किया, इस से मुझे कोई प्रोब्लम नहीं है. मुझे प्रोब्लम है तुम्हारे झूठ बोलने से. मैं कई बार पहले भी कह चुकी हूं कि मुझ से हमेशा सच बोला करो."

"जी भाभी, आइंदा खयाल रखूगी," कह कर प्रिया तेजी से अपने कमरे की तरफ बढ़ गई. विकास ने प्यार से पत्नी नताशा को निहारते हुए पूछा, “नताशा, तुम्हें यह कैसे पता चल जाता है कि प्रिया झूठ बोल रही है या सच? मैं होता तो तुरंत उस की बात मान लेता कि वह ऐक्स्ट्रा क्लास के लिए ही गई होगी. तुम ने पहले भी कई दफा उस का झूठ पकड़ा है और 1-2 बार मेरा झूठ भी. पर मैं समझ नहीं पाता कि तुम्हें पता कैसे चल जाता है ?"

नताशा ने हंसते हुए कहा, "देखो विकास, झूठ पकड़ना बहुत आसान है. सामने वाला झूठ बोल रहा है या सच, इस का इशारा वह खुद देता है.' 'इशारा, वह कैसे?"

'दरअसल, सच या झूठ का अंदाजा आप उस की बौडी लैंग्वेज यानी शरीर के हावभाव से लगा सकते हैं. इस के लिए सामने वाले की बौडी लैंग्वेज पर गौर करना पड़ता है.

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