ऐसी भी होती है पेरेंटिंग स्टाइल्स
Grehlakshmi|June 2020
ऐसी भी होती है पेरेंटिंग स्टाइल्स
माता-पिता को पता होना चाहिए कि वे अपने बच्चे के साथ कैसा पेरेंटिंग स्टाइल अपनाएं, ताकि बच्चा आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बन सकें। आइए जानें कुछ इसी बारे में
शिखा जैन

माता-पिता के द्वारा अपनाया गया पेरेंटिंग स्टाइल ही बच्चों के भविष्य की नींव रखता है। अपने पेरेंटिंग स्टाइल के ज़रिये ही पेरेंटस बच्चों को संस्कार देते हैं। वैसे तो सभी पेरेंटस बच्चों को अच्छे से ही पालना चाहते हैं लेकिन ऐसा करने में कुछ ज्यादा सख्त हो जाते हैं और कुछ नरम। इन सभी के अपने- अपने फायदे और नुकसान होते हैं। कहते हैं ना कि अति हर चीज की बुरी होती है, इसलिए ना तो बच्चों के साथ बहुत ज्यादा सख्त बनना अच्छा होता है और ना ही बहुत ज्यादा नर्म बनना। परवरिश करने के भी बहुत सारे तरीके हैं, आज हम आपको कुछ ऐसे ही तरीकों के बारे में बता रहे हैं।

डॉल्फिन पेरेंटिंग

यह पेरेंटिंग का आदर्श रूप है। ऐसे पेरेंटस बच्चों को प्यार तो बहुत करते है, लेकिन वह उन्हें अनुशासन में रखना भी जानते हैं। ऐसे पेरेंटस इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि किस समय बच्चों के साथ कैसे व्यवहार की जरूरत होती है। ऐसे पेरेंटिंग वाले बच्चे सही नियमों और दिशा-निर्देशों का अनुसरण करने में योग्य, आत्मविश्वास से भरपूर और स्वतंत्र होते हैं।

• ऐसे पेरेंट्स का पेरेटिंग स्टाइल संतुलित होता है। वह दृढ़ और लचीले दोनों होते हैं।

• ये पेरेंटस अपने बच्चों को निर्णय लेने में मदद करते हैं, लेकिन आखिरी निर्णय लेने के लिए उन्हें स्वतंत्र छोड़ते हैं, ताकि वह खुद अपना फैसला करने में सक्षम बन सकें। ये बच्चे अपने पेरेंटस की पूरी रेस्पेक्ट करते हैं।

• ये माता पिता से डरते भी हैं और उनसे अपनी हर बात शेयर भी करते हैं। इनके बीच कोई हिचकिचाहट नहीं होती।

• इन बच्चों को सही और गलत का पाठ बचपन में ही पढ़ा दिया जाता है, इसलिए कोई भी गलती करने से पहले ये बच्चे एक बार सोचते जरूर है और अपनी गलतियों से सीखते हुए ही आगे बढ़ते हैं।

• ये बच्चे आत्मविश्वास से भरपूर होते हैं।

हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग

कई पेरेंटस को लगता है कि वे अपने बच्चे बहुत ज्यादा प्यार करते हैं। इस तरह की पेरेंटिंग में हर वक्त अपने बच्चे का सुरक्षा कवच बनकर रहना, उसके आसपास हर वक्त मंडराते रहना, उसके लिए हर फैसला खुद लेना, उसे दुखों और गमों से लड़ना सिखाने की बजाय कोई भी दुख हो, उनसे दूर रखना, उनसे कठिनाइयों को शेयर ही ना करना, हमेशा गेम में खुद हार जाना और बच्चे को जिताना, ये सब उसके विकास के लिए ठीक नहीं है और इसे ही कहते हैं हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग।

• इस पेरेंटिंग में माता-पिता को पता नहीं होता है कि यह व्यवहार बच्चे की ग्रोथ को कम करेगा और उसे बड़ा होने ही नहीं देगा। वह अपना कोई फैसला कभी खुद ले ही नहीं पाएगा, बल्कि वह हर बात के लिए आपका मुंह देखेगा, लेकिन सच तो यह है कि वह स्कूल-कालेज, बाहर की दुनिया में हर वक्त आपके साथ नहीं रह सकता। उसे अपने सामने आने वाली परेशानियों और विपरीत परिस्थियों का खुद ही सामना करना पड़ेगा। बच्चा अगर आप से बहुत प्यार और लाड़ करता है तो अपना लाड़ उसके काम करके ना दिखाएं, बल्कि उसे वह सब काम करना सिखाएं ताकि वह अपने पैरों पर खड़े हो सके।

• बच्चा आज कौन से कपड़े पहनेगा, उसके बाल कैसे कटवाने है, वह कौन-सा प्रोग्राम देखेगा, वह क्या खाएगा। ये सब कुछ हद तक तो ठीक है, लेकिन हर वक्त अपनी मर्जी बच्चे पर ना थोपें, बल्कि कई बार उससे खुद अपने बारे में फैसला लेने को कहें। उसे उसकी पसंद के कपड़े पहनाएं, उसकी पसंद के दोस्त बनाने दें, ताकि बच्चे को अपनी पसंद और नापसंद के बारे में पता हो और वह अपने हिसाब से बिना किसी की मदद के कुछ काम करना सीखें।

• बच्चे को हर बात में ना टोकें। हर वक्त उसे अपने हिसाब से ना चलाएं। इससे वह बिल्कुल आप जैसा बन जाएगा। उसकी अपनी पर्सनेलिटी डेवलप नहीं हो पाएगी।

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