लव-आजकल

Grehlakshmi|February 2020

लव-आजकल
प्यार में स्वच्छंदता और सहजता जरूरी है, पर इसकी भी अपनी सीमा होनी चाहिए, क्योंकि जब इनकी सीमाएं टूटती हैं, तो प्यार के मायने ही पूरी तरह बदल जाते हैं।
यशोधरा वीरोदय

हुकअप और ब्रेकअप सॉन्ग गुनगुनाने वाली आज की जनरेशन के लिए प्यार, दो दिलों को बांधने वाला बंधन नहीं रहा, बल्कि अब तो स्टेटस के तौर पर रिलेशनशिप बदलने का चलन चल पड़ा है। जी हां, समय के साथ न सिर्फ प्यार के तराने बदले हैं, बल्कि आज तो प्यार के मायने पूरी तरह से बदल चुके हैं। आज प्यार के नाम पर लोग सब कुछ कर ले जाते हैं, बस प्यार ही । नहीं करते हैं। देखा जाए तो मानवीय रिश्तों में आया ये बदलाव सामाजिक ढांचे में आए बदलाव का ही परिणाम है। सोशल मीडिया के इस जमाने में रिश्ते बनाना जितना आसान हो चुका है, उतना ही मुश्किल है इन्हें मुकम्मल बनाना। आज प्यार किसी व्यक्ति विशेष के प्रति स्नेहभाव नहीं, बल्कि दिखावे का जरिया बन चुका है और जब बात दिखावे की हो तो उचित-अनुचित का ख्याल कहां रह जाता है। ऐसे में आधुनिकता के नाम पर रिश्तों में आई ये स्वच्छंदता और संवेदहीनता बेहद चिंताजनक और विचारणीय हो चुकी है। सवाल ये है कि हम ऐसी परिस्थिति में क्यों पहुंचे हैं, जहां खत्म हो चली मानवीय संवेदनाओं के साथ प्यार के मायने भी बदल गए हैं।

ये कहां आ गए हम

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February 2020