मध्य वर्ग-बिना किसी वर्ग का एक वर्ग
Bhugol aur Aap|July 2020
मध्य वर्ग-बिना किसी वर्ग का एक वर्ग
यदि कोई एक चीज जो भारत में ‘वर्ग' के प्रश्न को चरितार्थ करता है, वह है मध्य वर्ग का लेबल लगना व इसमें शामिल होने की आकांक्षा। यही अवधारणा मध्यम वर्ग की श्रेणी को एक सर्व-विस्तारवादी बनाता है और कुछ हद तक एक मिश्रित थैला भी। इस उभड़ा हुआ और विकृत मध्य वर्ग के परिणामस्वरूप, इसके नीचे के बहुत कम परिभाषित या सीमांकित निम्न या कामकाजी वर्ग को ढक लेने की तथा इससे ऊपर के विशेषाधिकार प्राप्त मलाईदार ऊपरी वर्ग से ध्यान हटाने की प्रवृत्ति रही है। अपनी अस्पष्टता के संदर्भ में भारत में ‘वर्ग' प्रश्न की भ्रामक प्रकृति, अंतर-पारस्परिकता के कारण जाति रूपी एक अन्य बदनुमा स्तरीकरण की वजह से जटिल हो जाती है।

मध्य वर्ग के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है इसका बृहत आकार, जो न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में अलग-अलग है। फरवरी 2009 में द इकोनॉमिस्ट ने प्रकाशित किया था कि दुनिया की 50 प्रतिशत आबादी मध्यम वर्ग में प्रवेश कर चुकी है, जिसका मुख्य कारण उदीयमान अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि है। इसकी तुलना में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) की ओर से अधिक रूढ़िवादी अनुमान सामने आए हैं जिसके मुताबिक वर्ष 2010 में दुनिया में केवल 1.8 अरब लोग मध्य वर्ग में आते हैं। क्रेडिट सुइस की ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट 2014 के अनुसार यह आंकड़ा थोड़ा कम है, जिसमें 10,000 से 100,000 अमेरिकी डालर के बीच संपदा के साथ 1 अरब आबादी शामिल है। वर्ष 1990 और 2015 के बीच, चीन में मध्यम वर्ग आबादी 15 प्रतिशत से बढ़कर 62 प्रतिशत हो गया। अभिजीत रॉय के अनुसार, भारत में वर्ष 2015 में 50 प्रतिशत आबादी मध्यम वर्ग की स्थिति में पहुंच गई।

भारत में मध्यम वर्ग के बारे में जो कुछ कहा गया है, उसके बारे में तात्कालिक सावधानी के साथ, इस बात पर बल दिया जाना चाहिए कि शायद यह दो मायने में अतिरंजित रहा है। पहला यह कि, इसकी संख्या के संदर्भ में, लगभग हर कोई मध्यम वर्ग की स्थिति का दावा करने की कोशिश कर रहा है, तब भी जब वे इस वर्गीय आय स्तर से बाहर आ चुके हैं। दूसरा यह कि, वास्तविक खपत के स्तर के संदर्भ में, इस वर्ग के सर्वोच्च स्तर पर मौजूद चंद लोग ही अधिक विकसित पूंजीवादी देशों के लोगों के उपभोग को प्रतिस्पर्धा दे सकें या बराबरी कर सकें। या उनके बराबर होंगे। यह 'अभी तक वहां नहीं' मध्यम वर्ग, जिनकी संख्या काफी कम नहीं है, को हाल ही में 'आकांक्षी' (एस्पिरेशनल) मध्यम वर्ग के रूप में चित्रित किया गया है। 'आकांक्षी' शब्द इस 'अभी तक वहां नहीं' के कष्टप्रद खाई को अभिव्यक्त करता है। देश ने जो राजनीतिक दिशा ली है, उसके लिए यह अहम परिणाम भी है खासकर वर्ष 2014 के बाद के मोदी शासन काल के वर्षों में।

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