समुद्र तटीय समुदाय के लिए महासागर स्थिति पूर्वानुमान सेवाएं
Bhugol aur Aap|May - Jun 2020
समुद्र तटीय समुदाय के लिए महासागर स्थिति पूर्वानुमान सेवाएं
उत्तरी हिंद महासागर में भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास पूर्ण प्रचालित महासागर स्थिति पूर्वानुमान (ओएसएफ) सेवाएं हैं। यह अपतटीय और तट के निकट की गतिविधियों, दोनों के लिए समुद्र में सुचारू संचालन के लिए लाखों उपयोगकर्ताओं का समर्थन करता है। ईएसएसओ-इंकॉइस की ओएसएफ सेवाएं सटीक, समयोचित पूर्वानुमान और परामर्श के साथ उच्च वैश्विक मानक की हैं। वे एक मजबूत स्व-स्थाने और उपग्रह प्रेक्षणों के साथ-साथ बहु-मॉडल अनुकरण के साथ अत्याधुनिक गणनांक सुविधाओं द्वारा समर्थित हैं। सुपरिभाषित प्रसार प्रणाली के निर्माण के लिए यह ये सेवाएं नवीनतम सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) उपकरणों को समाहित करती हैं। ईएसएसओ-इंकॉइस ने उपयोगकर्ता सुझाव के आधार पर प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान निर्माण के लिए अपने सामान्य पूर्वानुमानों को व्यवस्थित किया है। इसकी हालिया सेवा समुद्र में काफी दूर मछली पकड़ने वाली नौकाओं तक भी पहुंच रही है और ये प्रणालियां 'नैविगेशन विद् इंडियन कॉन्सटिलेशन' (नाविक) और 'गगन इनेबल्ड मैरीनर इंस्ट्रूमेंट फॉर नेविगेशन एंड इंफॉर्मेशन' (जेमिनी) के माध्यम से समर्थित हैं। ईएसएसओ-इंकॉइस क्षेत्र की ब्लू इकोनॉमी के उपयोग के लिए बढ़ती जरूरतों में सक्रिय मददगार की भूमिका निभाता है
टी. एम. बालाकृष्णन नायर, आर. हरिकुमार, के. श्रीनिवास, एम. अनुराधा, के. कवियाझाहु, आर. कुमारी और वाई. ग्रोवर

भारत अंडमान, निकोबार और लक्षद्वीप द्वीपसमूह सहित 7500 किमी से अधिक की लंबी तटरेखा से संपन्न है। देश की सामुद्रिक गतिविधियां वैविध्य हैं और इनमें कुटीर/मशीनीकृत मात्स्यिकी, जहाजरानी गतिविधियां, तटीय पर्यटन, तेल/प्राकृतिक गैस/खनिज अन्वेषण, रक्षा हित और समुद्री अनुसंधान शामिल हैं। समुद्र की स्थिति पर पूर्व सूचना न केवल समुद्र में जाने वालों के लिए बल्कि समुद्र के किनारे रहने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उपयोगकर्ता पूर्वानुमान, सावधानी, चेतावनी और जारी परामर्शों के आधार पर सूचित निर्णय प्राप्त कर सकते हैं। उपयोगकर्ताओं के लिए आर्थिक लाभ भी उपार्जित किए जाते हैं जो कि ब्लू इकोनॉमी को प्राप्त करने की दिशा में भारत के लक्ष्यों को मजबूत करने में मदद करते हैं। उपयोगकर्ताओं के सुझाव और मूल्यांकन बताते हैं कि पूर्वानुमान 80 प्रतिशत सटीक हैं और ये समय पर अधिकांश अंतिम उपयोगकर्ताओं तक भी पहुंच जाते हैं, जो जन व धन को बचाने के लिए महत्वपूर्ण है। ईएसएसओ-इंकॉइस की ओएसएफ सेवाओं की गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली को 2014 में आईएसओ 9001:2008 प्रमाणन के साथ सम्मानित किया गया है। भारत वर्ष 2007 से उपयोगकर्ताओं को महासागर स्थिति पूर्वानुमान प्रदान कर रहा है और बाद में इन सेवाओं को अन्य देशों में विस्तारित किया इन बहु-मॉडलों पर और साथ ही इनके मान्यीकरण पर कई लेख प्रकाशित हुए हैं (सबिक एवं अन्य, 2012; नायर एवं अन्य 2013; नायर एवं अन्य 2014)।हालांकि, इस पर आम सहमति है कि अब केवल सटीक और समय पर मौसम पूर्वानुमान/चेतावनी जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अब ‘प्रभाव-आधारित' सूचना की मांग है (डब्ल्यूएमओ 2015)।विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) नियमावली के अनुसार, इसके सदस्य देशों के सभी मौसम पूर्वानुमान केंद्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने सामान्य पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाओं को बहु-खतरा प्रभाव-आधारित में परिवर्तित/अपग्रेड करें। डब्ल्यूएमओ मैनुअल (डब्ल्यूएमओ 2018) का नवीनतम अपडेट एक दिशानिर्देश लाया है जिसके मुताबिक 'चेतावनी--असामान्य और खतरनाक समुद्री-बर्फ स्थिति और खतरनाक समुद्री स्थिति के लिए दी जानी चाहिए'। इसी परिप्रेक्ष्य में और यह जानते हुए कि भारत के उष्णकटिबंधीय तट बहु-खतरा प्रवण हैं, इंकॉइस अपने पूर्वानुमानों को 'खतरनाक सागरों की पहचान' और भावी उच्च समुद्री परिस्थितियों को अल्पकालिक पूर्वानुमानों और विशेष चेतावनियों/ सावधानियों के माध्यम से परिवर्तित कर रहा है (तालिका 1 और 2)

उपयोगकर्ता

ईएसएसओ-इंकॉइस सेवा उपयोगकर्ताओं में मात्स्यिकी और तटीय आबादी, समुद्री बोर्ड, भारतीय नौसेना और तट रक्षक, जहाजरानी और ऊर्जा क्षेत्र, हाइड्रोकार्बन उद्योग, बंदरगाह प्राधिकरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, आपदा प्रबंधन एजेंसियां, गैर सरकारी संगठन और अनुसंधान संगठन शामिल हैं। हाल में, इन सेवाओं की मांग बहुत बढ़ गई है (चित्र-1)।

मात्स्यिकी क्षेत्र: मात्स्यिकी क्षेत्रक प्राथमिक उपयोगकर्ता है और अपनी हाशिए की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की पृष्ठभूमि में, महासागर सूचना सेवाओं से उन्हें बहुत लाभ होता है। उन्हें संभावित मत्स्य क्षेत्र के बारे में परामर्श दिया जाता है जो उन्हें पहचाने गये क्षेत्र का पता लगाने और बड़ी मात्रा में मछली पकड़ने में सहायता करते हैं। वर्ष के लगभग 60 दिनों की मात्स्यिकी प्रतिबंध अवधि को छोड़कर नियमित रूप से उन्हें यह सेवा प्रदान की जाती है। इसके अलावा, प्रतिकूल महासागरीय स्थिति के मामले में, ओएसएफ विंग भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के साथ एक संयुक्त बुलेटिन जारी करता है जो मछुआरों को समुद्र में मछली पकड़ने से बचने का अनुरोध करते हुए सावधान करता है।

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