भारतीय सुनामी पर्व चेतावनी प्रणाली
Bhugol aur Aap|May - Jun 2020
भारतीय सुनामी पर्व चेतावनी प्रणाली
हिंद महासागर सुनामी, जो 26 दिसंबर, 2004 को सुमात्रा-अंडमान भूकंप के कारण उत्पन्न हुआ था, ने 2,30,000 लोगों की जाने ले ली और हिंद महासागर के कई तटीय देशों में बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचाया। वास्तव में, 2004 की सुनामी तीव्रता के संदर्भ में सर्वाधिक शक्तिशाली और सर्वाधिक घातकों में से एक थी, और जिसने भारत में सुनामी के लिए एक पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने की आवश्यकता को परिप्रेक्ष्य में रखा। वर्ष 2004 की सुनामी के बाद, हिंद महासागर में भूकंप के कारण उत्पन्न होने वाली सुनामी पर पूर्व चेतावनी देने के लिए भारतीय सुनामी पूर्व चेतावनी प्रणाली की स्थापना की गई थी। यह आलेख आईटीईडब्ल्यूएस के विभिन्न घटकों, निर्णय समर्थन प्रणाली और बुलेटिन का वर्णन करता है। यह मुद्दों, चुनौतियों और भावी विकास पर भी चर्चा करता है।
ई. पट्टाभि रामा राव, च. पतंजलि कुमार, बी. अजय कुमार, एम. वी. सुनंदा, आर. एस. महेंद्र, पी. एल. एन. मूर्ति, जे. पद्मनाभम, डी. सैकिया और एस. एस. सी. शेनॉय

भारत की तट रेखा 7500 किमी से अधिक लंबी है और देश की 30 प्रतिशत आबादी यहां बसती है। तटीय क्षेत्र में तटीय आबादी, पारिस्थितिकी तंत्र और अवसंरचनाओं पर सुनामी और तूफान महोर्मि जैसी महासागरीय आपदाओं की वजह से अधिक संकटग्रस्त होती जा रही हैं। ये परिघटनाएं न केवल जीवन और तटीय पारिस्थितिक तंत्र को नष्ट करती हैं, बल्कि आर्थिक क्षेत्रों जैसे कृषि, आवास और पर्यटन के साथ-साथ परमाणु और पारंपरिक बिजली संयंत्रों और तटीय परिवहन नेटवर्क (पोर्ट व हार्बर सहित) को भी प्रभावित करती हैं। हालांकि, हिंद महासागर में तूफान महोर्मि के विपरीत सुनामी दुर्लभ है, परंतु यह अल्प समय में ही बेसिन स्केल पर व्यापक क्षति पैदा करते हैं।

26 दिसंबर, 2004 को इंडोनेशिया के बांदा अशेह तट के पास 9.3 एमडब्ल्यू तीव्रता (साथ में लगभग 10 से 12 मिनट का सर्वाधिक दीर्घावधिक रप्चर समय दर्ज किया गया) का भूकंप आया जिसने सुनामी को जन्म दिया। हिंद महासागर सुनामी अब तक दर्ज की गई सर्वाधिक विध्वंसकारी थी और इसमें हिंद महासागर के तटीय क्षेत्रों में 2,30,000 से अधिक लोग मारे गए और दस लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए। इस विनाशकारी घटना के मद्देनजर, भारत सरकार ने अत्याधुनिक भारतीय सुनामी पूर्व चेतावनी प्रणाली की स्थापना की। यह एक तरह की बहु-संस्थागत रूपरेखा है जिसे रिकॉर्ड समय में स्थापित किया गया था। भारतीय सुनामी पूर्व चेतावनी केंद्र (आईटीईडब्ल्यूएसः इंडियन सुनामी अर्ली वार्निंग सेंटर) की स्थापना ईएसएसओ-भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (इंकॉइस), हैदराबाद में की गई थी और इसे अक्टूबर 2007 में आरंभ किया गया था (गुप्ता 2005)।आईटीईडब्ल्यूसी निकट वास्तविक समय में डेटा प्राप्त करने, डेटा प्रसंस्कृत करने तथा विभिन्न हितधारकों को सुनामी परामर्श प्रसार के लिए विशेषज्ञ संसाधनों और परिष्कृत कम्प्यूटेशनल और संचार सुविधाओं से लैस है। चेतावनी केंद्र हिंद महासागर में सुनामी विकास की निगरानी और समय पर परामर्श जारी करने के लिए चौबीसों घंटे काम करता है। आईटीईडब्ल्यूसी के साथ टीएसपी (सुनामी सेवा प्रदाता) इंडोनेशिया और टीएसपी ऑस्ट्रेलिया को अंतर-सरकारी समन्वयन समूह द्वारा अंतर-सरकारी महासागरीय आयोग के हिंद महासागर सुनामी चेतावनी एवं उपशमन प्रणाली (आईसीजी/ आईओटीडब्ल्यूएमएस) के लिए अंतर-सरकारी समन्वयन समूह द्वारा हिंद महासागर क्षेत्र में हिंद महसागर को सीमा बनाने वाले 25 देशों को सुनामी पूर्व चेतावनी के लिए सुनामी सेवा प्रदाता के रूप में मान्यता प्राप्त है।

हिंद महासागर में सुनामी खतरों को संबोधित करने के लिए आईटीईडब्ल्यूसी के चार घटक हैं। पहला है, हिंद महासागर के सबडक्शन क्षेत्रों में-अंडमान, सुमात्रा और मकरान सबडक्शन जोन में उत्पन्न होने वाले बड़े भूकंप। दूसरा है, अधिकेंद्र क्षेत्रों के निकट के सुनामी बूई के द्वारा जल स्तर में महत्वपूर्ण परिवर्तन से सुनामी उत्पन्न होने की पुष्टि। तीसरा है, संख्यात्मक मॉडल आउटपुट का उपयोग करके खतरा के तहत क्षेत्रों की पहचान और अंत में चौथा घटक है तटीय ज्वार गेज और उच्च आवृत्ति तटीय रडार द्वारा सुनामी तरंगों की प्रगति की निगरानी।

प्रेक्षण नेटवर्क

भूकंपों पर नजर रखने के लिए भूकंपीय नेटवर्कः आईटीईडब्ल्यूसी दुनिया के किसी भी कोने से 5 से अधिक तीव्रता के भूकंपों का स्वतः पता लगाने के लिए भूकंपीय नेटवर्क से वास्तविक समय में प्राप्त डेटा का उपयोग करता है। भूकंपरोधी नेटवर्क में राष्ट्रीय (वास्तविक समय भूकंपीय निगरानी नेटवर्कः आरटीएसएमएन) और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क [(भूकंपविज्ञान के लिए सम्मिलित अनुसंधान संस्थानः (आईआरआईएस)],ग्लोबल सिस्मोग्राफिक नेटवर्क (जीएसएन) और जियोफॉशुंग्सनेटज (जियोफॉन)] के लगभग 400 भूकंपीय स्टेशन शामिल हैं। यह प्रणाली हिंद महासागर क्षेत्र में सुनामी सृजित करने में सक्षम भूकंपों की न्यूनतम संभव समय में निगरानी और रिपोर्टिंग करने में सक्षम है।

भूकंप माप नेटवर्क और महासागर संबंधित प्रेक्षणों द्वारा प्रदान की गई भूकंप सूचनाओं के आधार पर, आईटीईडब्ल्यूसी पानी के भीतर भूकंपों के सुनामी सृजन क्षमता का मूल्यांकन करता है और मानक संचालकीय प्रक्रिया के अनुरूप प्रारंभिक गुणात्मक आकलन जारी करता है।

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