महासागर प्रेक्षण
Bhugol aur Aap|May - Jun 2020
महासागर प्रेक्षण
मौसम और जलवायु का निर्धारण करने में महासागर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समुद्र की भौतिक और रासायनिक स्थिति समुद्री पर्यावासों और समुद्री जीवन के स्वास्थ्य का निर्धारण करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए स्व-स्थाने (इन-सीटू) महासागर प्रेक्षण प्लेटफार्मों द्वारा एकत्र किए गए डेटा के माध्यम से विभिन्न समय पैमानों पर समुद्र स्थिति में भिन्नता के कारणों को समझना अनिवार्य है। इसके अलावा, स्व-स्थाने प्रेक्षण नेटवर्क के माध्यम से प्राप्त ज्ञान, महासागर स्थिति पूर्वानुमान प्रणालियों के विकास में निर्माण खंड के रूप में कार्य करता है। इन पहलुओं पर विचार करते हुए ईएसएसओ-इंकॉइस, महासागर प्रेक्षण नेटवर्क (ओओएन) कार्यक्रम के तहत हिंद महासागर में विभिन्न स्व-स्थाने प्रेक्षण प्लेटफार्मों को बनाए रखता है। इन नेटवर्कों का सारांश इस लेख में संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है।
वी. पी. थंगाप्रकाश, एम. एस. गिरीशकुमार, एन. सुरेश कुमार, अजय कुमार, ए. न्हेराकोल और ई. पट्टाभि रामा राव

स्व-स्थाने (इन-सीटू) महासागर प्रेक्षणों का एक समग्र नेटवर्क सभी परिचालन महासागर पूर्वानुमान प्रणालियों का एक अभिन्न अंग के रूप में कार्य करता है। इन नेटवर्कों के माध्यम से प्राप्त जानकारी महासागर की स्थिति और इसके अंतर्निहित भौतिकी की समझ को सक्षम करती है, जो इसके बाद संख्यात्मक मॉडल के साथ इसके आकलन को सुगम करता है। इसके अलावा, महासागर के प्रेक्षण अतीत और वर्तमान जलवायु के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं जो भविष्य की जलवायु प्रणालियों के आकलन में शोधकर्ताओं की सहायता करता है। इसके परिणामस्वरूप नीति निर्माता, सामाजिक और पर्यावरण संरक्षणवादी पारिस्थितिकी तंत्र और समाज पर इसके प्रभावों के उपशमन में मदद करने के लिए बेहतर तैयारी के क्रम में अनुमानों का उपयोग कर सकते हैं। 20वीं शताब्दी से पहले हिंद महासागर को कम प्रेक्षित किया गया था। महासागर प्रेक्षण नेटवर्क (ओओएन) कार्यक्रम के तहत विभिन्न प्रेक्षण प्रणालियों की शुरुआत के साथ पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) द्वारा इस दिशा में प्रयासों को बढ़ाया गया। अन्य संस्थानों के सहयोग से ईएसएसओ-इंकॉइस और ईएसएसओ-एनआईओटी को ओओएन के कार्यान्वयन का जिम्मा सौंपा गया। मोटे तौर पर तटीय प्रेक्षण प्रणाली, बृहत-पैमाना प्रणाली और मेसोस्केल और उप-मेसोस्केल महासागर प्रेक्षण प्रणाली के रूप में वर्गीकृत ओओएन में वे प्रणालियां शामिल हैं जो आपदा प्रबंधन की सुविधा भी प्रदान करती हैं (चित्र 1)। यह आलेख इंकॉइस द्वारा देख-रेख वाले महासागर इन-सीटू प्रेक्षण नेटवर्क और समाज में इसके योगदान को प्रस्तुत करता है।

तटीय महासागर प्रेक्षण प्रणाली

एक तटीय महासागर प्रेक्षण प्रणाली में कई मंच शामिल हैं जो भारतीय तटों और द्वीपों के साथ महाद्वीपीय ढलान और मग्न क्षेत्रों पर जानकारी एकत्र करते हैं। इस तरह के प्लेटफार्मों में 'निकट-तट के साथ लहर निगरानी' (वेव मॉनिटरिंग एलॉन्ग नियर-शोरः डब्ल्यूएएमएएन) बूई नेटवर्क शामिल हैं जो वेव राइडर बूई (डब्ल्यूआरबी), कोस्टल एक्वास्टिक डॉप्लर करंट प्रोफाइलर्स (एडीसीपी) और ज्वार गेज नेटवर्क का उपयोग करते हैं। डब्ल्यूएएमएएन (वामन) परियोजना 2008 में शुरू की गई थी और वर्तमान में भारतीय तटों के साथ 15 डब्ल्यूआरबी सक्रिय हैं (चित्र 2)। डब्ल्यूआरबी लहर की ऊँचाई और लहर की दिशा, सतह धारा और तापमान को मापती है। इनसैट संचार के माध्यम से वामन नेटवर्क से प्राप्त निकट वास्तविक-समय डेटा का विस्तृत उपयोग मॉडल लहर पूर्वानुमानों को परिष्कृत करने के लिए किया जाता है। यह तटों पर लहर विशेषताओं की दीर्घकालिक निगरानी के लिए भी अवसर प्रदान करता है, विशेष रूप से चरम मौसमी घटनाओं जैसे कि चक्रवात के दौरान। ईएसएसओ-इंकॉइस, दक्षिणी महासागर के महातरंगों के उत्तरवर्ती प्रसार पर नजर रखने के लिए सेशेल्स तट की डब्ल्यूआरबी का भी अनुरक्षण करता है, जो भारत के तटों को काफी प्रभावित करती है।

मौसमी, अंतर-मौसमी और अंतर-वार्षिक समय-पैमाने पर तटीय धारा परिवर्तनशीलता को दर्ज करने के लिए, सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी (एनआईओ) के सहयोग से ईएसएसओ-इंकॉइस तटों पर 17 तटीय एडीसीपी उप-सतह लंगर नेटवर्क का अनुरक्षण करता है (चित्र-3) जहां 13 लंगर महाद्वीपीय ढलान से परे हैं-प्रत्येक तटीय राज्य में एक और निमग्न लंगर पूर्वी तट पर 4 जिनमें अंतर-लंगर जगह 2.5 से 30 के बीच है। इस नेटवर्क के डेटा भी सामान्य महासागर संचलन मॉडल द्वारा अनुकरणीय धारा क्षेत्र के सत्यापन के लिए एक अवसर प्रदान करते हैं।

सुनामी लहरों की प्रगति की निगरानी के लिए, ईएसएसओ-इंकॉइस वर्ष 2010 के बाद से भारतीय सर्वेक्षण विभाग (एसओआई), देहरादून के सहयोग से 36 ज्वार गेज स्टेशन का अनुरक्षण करता है (चित्र-4)। इन आंकड़ों का उपयोग दीर्घ-अवधि समुद्र स्तर रुझानों को समझने के साथ-साथ तूफान महोर्मि मॉडल आउटपुट के सत्यापन के लिए किया जाता है। 36 स्टेशनों में से, 21 स्टेशन 2010-2011 के बाद से इनसैट संचार के साथ रडार, दबाव और शाफ्ट एनकोडर सेंसर से लैस हैं, जबकि 15 स्टेशन 2015-2016 के बाद से केवल रडार सेंसर जीपीआरएस से लैस हैं। ईएसएसओ-इंकॉइस में दोनों वास्तविक समय में प्राप्त किए जाते हैं।

बृहत स्तर प्रेक्षण प्रणाली

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