अंतरिक्ष से मत्स्य खोज

Bhugol aur Aap|May - Jun 2020

अंतरिक्ष से मत्स्य खोज
हैदराबाद स्थित ईएसएसओ-इंकॉइस द्वारा प्रदान की जाने वाली संभाव्य मत्स्य ग्रहण क्षेत्र (पीएफजेड) परामर्श ने भारतीय तट पर मछुआरा समुदाय के जीवन और आजीविका में उल्लेखनीय बदलाव किया है। इसने मछली झुंड (शोल) की तलाश में लगे समय, प्रयास और ईंधन के संदर्भ में महत्वपूर्ण बचत की है, इस प्रकार लाभप्रदता और मछुआरों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। यह परामर्श सीओ2 उत्सर्जन में कमी करने में भी उपयोगी है, और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण की सुरक्षा में योगदान देता है। यह आलेख अग्रणी पीएफजेड तकनीक पर एक विहंगावलोकन प्रदान करता है जिसने समुद्री परामर्श और पूर्वानुमान सेवाओं की विश्वसनीयता में एक मील का पत्थर स्थापित किया है।
मासुलुरी एन. के. और निमित कुमार

आज अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी एक ऐसे स्तर पर विकसित हो गई है कि मानव निर्मित उपग्रह, जो पृथ्वी के चारों ओर कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं, हर छोटी चीज के बारे में भी आसानी से बता देता है। ये उपग्रह वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के असंख्य रहस्यों के बार में एक झलक प्रदान करते हैं, जिससे प्रौद्योगिकियों का क्रमिक विकास होता है जो रोजमर्रा की जिंदगी पर एक उल्लेखनीय प्रभाव डालते हैं। हमारे अपने देश में, हैदराबाद स्थित भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (इंकॉइस), जो कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के तहत पृथ्वी प्रणाली विज्ञान संगठन (ईएसएसओ) की एक इकाई है, ने संपूर्ण भारतीय तट पर संभाव्य मत्स्य ग्रहण क्षेत्र पर परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराकर मछुआरे के जीवन पर एक परिवर्तनकारी प्रभाव डाला है। यह सेवा साल के 365 दिन प्रचालन में रहती है सिवाय संबंधित राज्य सरकारों द्वारा आरोपित 'समुद्री मात्स्यिकी प्रतिबंध' के दौरान या समुद्र में ऊंची लहरों के कारण मछली पकड़ना असुरक्षित होने पर।

पीएफजेड परामर्श, जो कि मुख्य रूप से उपग्रह डेटा पर सृजित किया जाता है, वास्तविक समय में जारी किया जाता है। प्रारंभ में, अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी), अहमदाबाद द्वारा विकसित, इस तकनीक को इंकॉइस को स्थानांतरित कर दिया गया था, जिसने इसे भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) और चित्र प्रसंस्करण उपकरण का उपयोग करके बेहतर डेटा प्रसंस्करण तकनीकों और स्वचालन के साथ परिचालन मोड पर लागू किया था। ईएसएसओ-इंकॉइस का समुद्री मत्स्य परामर्श सेवा (एमएफएएस) कार्यक्रम महासागर में उत्पादक क्षेत्रों की पहचान करने के लिए सुदूर से संवेदित समुद्री सतह तापमान (एसएसटी) और क्लोरोफिल सांद्रता का उपयोग करता है। एसएसटी, जो मछली के अनुकूल माहौल को इंगित करता है, को यूएसए की एनओएए श्रृंखला के उपग्रहों पर लगाये गये एंडवांस्ड वेरी हाई रिजोल्युशन रेडियोमीटर (एवीएचआरआर) सेंसर और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के मेटऑप श्रृंखला के उपग्रहों से प्राप्त किये जाते हैं। क्लोरोफिल सांद्रता, जो मछली के लिए आहार की उपलब्धता का संकेत देती है, भारतीय सुदूर संवेदी उपग्रह ओशनसैट-2, नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेश एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) यूएसए के मॉडरेट रिजोल्यूशन इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर (मोडिस) के अक्वा उपग्रह तथा सुओमी नेशनल पोलर-आर्बिटिंग पार्टनरशिप (सुओमी एनपीपी) पर लगे विजिब्ल इन्फ्रारेड इमेजिंग रेडियोमीटर सुइट (वीआईआईआरएस) संवेदी की मदद से पहचाना जाता है।

देश की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए, ये परामर्श सभी तटीय भाषाओं और तटीय माप इकाइयों में उपलब्ध हैं। परामर्श उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से भारतीय तट 14 क्षेत्रों में विभाजित है; गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, दक्षिण तमिलनाडु, उत्तरी तमिलनाडु, दक्षिण आंध्र प्रदेश, उत्तर आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, अंडमान, निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप समूह।

पीएफजेड परामर्श, जो मानचित्र और शब्द के रूप में प्रदान किया जाता है, उपयोगकर्ताओं को फैक्स से लेकर एंड्रॉइड आधारित मोबाइल एप्लिकेशन क्रमिक चैनल के माध्यम से प्रसारित किया जाता है (चित्र 1)।किसी पीएफजेड मानचित्र में मत्स्य ग्रहण जोन के अलावा प्रमुख अवतरण केंद्रों, बाथीमेट्री, अक्षांश और देशांतर ग्रिड के बारे में जानकारी होती है। समुद्र की गतिशील प्रकृति के कारण, पूर्वानुमानित मत्स्य ग्रहण क्षेत्र अपने मूल स्थानों से स्थानांतरित होते रहते हैं। उनके संभावित स्थानांतरण, सतह जल धारा गति तथा दिशा का पूर्वानुमान करने के लिए, मानचित्र पर डेटा समावेशित किया जाता है और मछुआरों को तदनुसार परामर्श दिया जाता है। चूंकि मछुआरा समुदाय कम साक्षर होते हैं, इसलिए शब्दों के रूप में प्रदान किये जाने वाले पीएफजेड परामर्श बहुभाषी प्रारूप; गुजराती, मराठी, कन्नड़, मलयालम, तमिल, तेलुगु, उड़िया, बंगाली के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध कराया जाता है, जो अक्षांश, देशांतर मान, महासागर की गहराई के साथ-साथ कोण, दिशा व अवतरण केंद्रों/ लाइटहाउस स्थानों पर महासागर के साथ-साथ कोण, दिशा और लैंडिंग केंद्रों /प्रकाश स्तंभों से दूरी के बारे में जानकारी देते हैं।

किस तरह से संगठन मछुआरों के पारंपरिक कौशल का मूल्यवर्द्धन कर रहा है?

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