रक्षाबंधन का यदि यह उद्देश्य हो तो...
Rishi Prasad Hindi|July 2020
रक्षाबंधन का यदि यह उद्देश्य हो तो...
आध्यात्मिक लाभ ही वास्तविक लाभ है, लौकिक लाभ तो धोखा है।

रक्षाबंधन पर बहन भाई को सूत्र का धागा बाँधती है। सगे भाई-बहन हों अथवा चित्त में जिसके प्रति भाई या बहन का भाव जग जाय वे यह पर्व मनाते हैं। यदि चित्त की शुद्ध व उम्दा भावनाएँ नहीं हैं तो राखी एक धागामात्र रह जाती है। यदि उम्दा, पवित्र, दृढ़ व सुंदर भावना है तो पतला-सा धागा बड़े चमत्कार सर्जित कर देता है।

ऋषियों ने कितना गहरा अध्ययन किया होगा! जीवन की मूल्यवान घड़ियों को, ऊर्जा को, दष्टि को नीचे के केन्द्रों में गिरने से बचाने के लिए रक्षाबंधन का उत्सव बड़ी मदद करता है।

बहन निरपेक्ष भाव से भाई के हाथ पर वह सूत्र का धागा बाँधे, भावना करे कि 'मेरा भाई ओजस्वी, यशस्वी, तपस्वी हो, जीवन्मुक्त हो, आप तरे और दूसरों को तारनेवाला हो।' ऐसी भावना करके यदि बहन राखी बाँधती है तो सचमुच वह बहन नहीं, साक्षात् लक्ष्मी है।

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