विद्यार्थी संस्कार
Rishi Prasad Hindi|July 2020
विद्यार्थी संस्कार
अपने प्रति न्याय और दूसरों के प्रति उदारता यह सिद्धांत निर्दोषता की सुरक्षा करता है।

आचार्य विनोबा भावे के पिता का नाम था नरहरि भावे और उनकी माँ का नाम था रखुमाई। रखुमाई और नरहरि भावे मानते थे कि 'अपनी कमाई के कुछ हिस्से का दानपुण्य करना चाहिए' तो एक गरीब विद्यार्थी को लाकर घर में रख देते थे। जब विनोबा विद्यार्थी थे तो उनकी माँ उनको धर्म की बातें सुनाती थीं : "बेटा ! ध्यान करने से यह लाभ होता है। भगवान का नाम लेना चाहिए, गरीबगुरबे की मदद करनी चाहिए, मौन रहना चाहिए। बेटा! सबमें ईश्वर हैं तो सबमें समानता रखनी चाहिए।"

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