महामारी ने इतने नहीं मारे तो किसने मारे?

Rishi Prasad Hindi|April - May 2020

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महामारी ने इतने नहीं मारे तो किसने मारे?
विवेक-वैराग्य प्रखर होने पर निर्भयता तथा साहस स्वभाव बन जाता है।
पूज्य बापूजी

आप अपने अंतःकरण में द्वेषरहित, अपराधरहित, विकाररहित अवस्था में विश्राम करो फिर जो होगा देखा जायेगा। मैं कई बार कह चुका हूँ, आप अंदर में पक्का संकल्प करो। कोई भी विचित्र परिस्थिति आ जाय, कोई भी कठिन परिस्थिति आ जाय, कोई भी मुसीबत आ जाय - तैयार रहो भीतर से। मुसीबत की ऐसी-तैसी हो जायेगी। जब आप भयभीत होते हैं तो जरा-सी मुसीबत भी आप पर हावी हो जाती है। मैंने सत्संग में दृष्टांतों के द्वारा कई बार बताया है।

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