पूज्य बापूजी द्वारा बताये गये गठिया रोग में अत्यंत लाभकारी प्रयोग

Rishi Prasad Hindi|January 2020

पूज्य बापूजी द्वारा बताये गये गठिया रोग में अत्यंत लाभकारी प्रयोग
ब्रह्मचर्य के प्रभाव से मन की एकाग्रता एवं स्मरणशक्ति का तीव्रता से विकास होता है।

एलोपैथी की दवाई रोगों को दबाती है जबकि प्राणायाम, आसन, उपवास आदि रोगों की जड़ को उखाड़कर फेंक देते हैं । इन उपायों से जो फायदा होता है वह एलोपैथी के कैप्सूल, इंजेक्शन आदि से नहीं होता है । वातरोग के ८० प्रकार हैं। उनमें से किसी भी प्रकार के वातरोग (गठिया आदि) में ये उपाय लाभदायी हैं।

(१) वायु मुद्रा : दोनों हाथों की अंगूठे के पासवाली प्रथम उँगली को मोड़कर अंगूठे के मूल में लगायें और अंगूठे से हलका-सा दबायें। शेष तीनों उँगलियाँ सीधी रहें। ५-१० -- मिनट दिन में ४-५ बार यह मुद्रा करें।

(२) प्राणायाम :

प्रयोग : १ - वायु मुद्रा में बैठो। फिर बायाँ नथुना बंद करके दायें नथुने से खूब श्वास भरो फिर जहाँ पर वातरोग का प्रभाव हो - चाहे घुटने का दर्द हो, चाहे कमर का दर्द हो, चाहे कहीं भी दर्द हो - उस भाग को हिलाओ-डुलाओ।

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