शक्ति तत्त्व
Jyotish Sagar|October 2020
शक्ति तत्त्व
जिस प्रकार विष्णु और शिव एक हैं, उसी प्रकार शक्ति भी उनसे अभिन्न है। एक ही परमतत्त्व के विभिन्न नाम हैं। जैसाकि 'मुण्डमालातन्त्र' में कहा गया है जैसे शिव हैं, वैसे ही दुर्गा हैं और जो दुर्गा हैं, वहीं विष्णु हैं। इनमें जो भेद मानता है, वह दुर्बुद्धि मनुष्य मूर्ख है। देवी, विष्णु और शिव आदि में एकतत्त्व ही देखना चाहिए।

इस प्रकार शिव और विष्णु को परब्रह्म परमात्मा, सृष्टिकर्ता एवं सर्वव्यापि बतलाया गया है। उसी प्रकार से शक्ति को भी बतलाया गया है। वे स्वयं कहती हैं :

अहं ब्रह्मरूपिणी, मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगदुत्पन्नम्।।

मैं ब्रह्मरूपिणी हूँ, प्रकृति-पुरुषात्मक जगत् मुझ से ही उत्पन्न हुआ है।

देवीभागवत् में कहा गया है कि :

सदैकत्वं न भेदोऽस्ति सर्वदैव ममास्य च।

योऽसौ साहमहं यासौ भदोऽस्ति मतिविभ्रमात् ।।

मैं और ब्रह्म दोनों में सदा एकत्व है, भेद कुछ भी नहीं है। जो वह है, वही मैं हूँ और जो मैं हूँ वही वह है। भेद भ्रान्ति से कल्पित है, वस्तुतः नहीं है।

इसी प्रकार के अनेक प्रमाण हैं, जिनसे भगवती का निर्गुण परब्रह्म स्वरूप और उनका सगुण निराकार सृष्टिकर्ता स्वरूप सिद्ध है। वे ही भगवती विभिन्न साकार रूपों में लीला करती हैं। भगवती के लीला रूपों में नवदुर्गा, दस महाविद्या, तीन प्रधान महादेवियाँ इत्यादि उल्लेखनीय हैं।

नवदुर्गा हैं : शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।

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