नागलोक की देवी मनसा देवी

Jyotish Sagar|July 2020

नागलोक की देवी मनसा देवी
सर्प का नाम सुनते ही किसी के भी तन में एक बार तो भय की लहर दौड़ ही जाती है, सर्पदंश का जीवन पर असर सभी जानते हैं, लेकिन सर्प की उपयोगिता कितनी महत्त्वशाली है, इस पर कम ही ध्यान दिया जाता है।
डॉ. हनुमान प्रसाद उत्तम

भगवान् विष्णु जो जगत् के पालनहार हैं, वे भी क्षीरसागर में शेष शय्या पर ही सुशोभित हैं तथा विश्व को चलाने वाली शक्ति भी वहीं रहती है। भगवान् शिव के स्वरूप को कौन नहीं जानता? गले से लेकर काया के खास अंगों में सर्पो का ही निवास है तथा समुद्र मंथन से निकला हलाहल उन्हीं के कंठ में समाया हुआ है। विदित है साँप पालक और संहारक दोनों ही शक्तियों में प्रभावी रूप से समाया हुआ है। इस महत्त्वशाली शक्ति के पीछे भी किसी उच्च कोटि की ताकत का ही हाथ हो सकता है। शक्ति के समस्त स्वरूप आदिशक्ति के अधीन हैं और इसी आदिशक्ति का एक स्वरूप 'विषहरी' के रूप में मौजूद है। 'विष' और 'हरि' यह दो शब्दों से निर्मित है, जो शिव और विष्णु भगवान् की तरफ इंगित करता है। विष्णु पुराण के चौथे अंश में एक वृत्तान्त तथा श्लोक है, जो इस शक्ति की उपयोगिता को दर्शाता है, वह है, नागों की बहन नर्मदा के बारे में।

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