सिंह लग्न के अष्टम भाव में स्थित सूर्य के फल
सिंह लग्न के अष्टम भाव में स्थित सूर्य के फल
कैमें से करें सटीक फलादेश क श्रृंखला के अन्तर्गत लग्नानुसार विभिन्न भावों में ग्रहों के स्थित होने पर उनके भावगत, राशि एवं नक्षत्रगत, दृष्टिजन्य एवं युतिजन्य फलों का सोदाहरण विवेचन किया जा रहा है।

अभी तक सभी लग्नों के लिए प्रथम भाव से सप्तम भाव तक के फलों का विवेचन किया जा चुका है, साथ ही मेष लग्न से कर्क लग्न में अष्टम भाव में स्थित सूर्यादि नवग्रहों के फलों का भी विवेचन विगतांक तक कर चुके हैं। उसी क्रम में प्रस्तुत आलेख से सिंह लग्न के अष्टम भाव में स्थित सूर्यादि नवग्रहों के फलों का विभिन्न आधारों पर सोदाहरण विवेचन किया जा रहा हैं।

सिंह लग्न के अष्टम भाव में मीन राशि होती है। यह शुक्र की उच्चराशि है, जबकि बुध की नीच राशि है। गुरु की यह स्वराशि है। सूर्य, मंगल एवं शनि के लिए यह मित्र राशि है। इस राशि में स्थित ग्रह पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद अथवा रेवती नक्षत्र में हो सकता है।

सिंह लग्न के अष्टम भाव में स्थित सूर्य के फल

सिंह लग्न में सूर्य लग्नेश होता है। लग्नेश का अष्टम भाव में स्थित होना सामान्यतः शुभफलप्रद नहीं माना जाता। यह शारीरिक एवं अन्य प्रकार के सुखों की दृष्टि से उचित नहीं होता। जातक को शैशवावस्था में मौसमी एवं अन्य बीमारियों से पीड़ित होना पड़ता है। ऐसा जातक ज्वर, तन्त्रिकातन्त्र, मस्तिष्क, नेत्र, एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता को हानि पहुँचाने वाले रोगों के प्रति संवेदनशील होता है। लग्नेश की अष्टम भावगत स्थिति जातक को अन्तर्मुखी एवं चिन्तनशील बनाती है। ऐसा जातक किसी न किसी रूप में भयातुर रहता है। दाम्पत्य सुख की दृष्टि से भी यहाँ स्थित सूर्य शुभ नहीं होता। एक ओर जहाँ विवाह में विलम्ब होता है, वहीं दूसरी ओर दाम्पत्य सुख अच्छा नहीं होता। यह अवश्य है कि जातक की उन्नति विदेश अथवा जन्म स्थान से दूर प्रदेश में होती है। यदि जातक जन्म स्थान अथवा उसके आसपास रहता है, तो उसे इसके अशुभफलों की प्राप्ति अधिक होती है। नैसर्गिक रूप से भी सूर्य की अष्टम भावगत स्थिति शुभ नहीं कही जा सकती। स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियँ अधिक होती हैं। सांसारिक सुख की तुलना में आध्यात्मिक, अध्ययन एवं अनुसंधान सम्बन्धी मामलों में यहाँ स्थित सूर्य बेहतर फलप्रद होता है।

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February 2020