शाबरमन्त्र साधना के ज्योतिषीय योग

Jyotish Sagar|March 2020

शाबरमन्त्र साधना के ज्योतिषीय योग
शाबर मन्त्र की साधना में किस व्यक्ति को सफलता मिलेगी और कब मिलेगी? इसका समुचित उत्तर ज्योतिष के माध्यम से जाना जा सकता है।

ज्योतिष में योगों के माध्यम से जातक की शाबरमन्त्र में रुचि, गुरु की कृपा तथा शाबरमन्त्र साधना की सामर्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त होती है, तो वहीं दशा एवं गोचर के आधार पर उस समय का ज्ञान होता है, जिसमें व्यक्ति शाबर मन्त्र साधना के लिए प्रवृत्त होता है और उसमें सफलता प्राप्त कर सकता है। भारतीय ज्योतिष में शाबरमन्त्र साधना की दृष्टि से निम्नलिखित भाव एवं ग्रह विचारणीय हैं :

भाव : शाबर मन्त्र साधना की दृष्टि से प्रथम, द्वितीय, पंचम, अष्टम, नवम एवं एकादश भाव प्रमुख रूप से विचारणीय हैं। प्रथम भाव अर्थात् लग्न व्यक्ति की तन्त्र एवं अध्यात्म में रुचि को दर्शाता है। द्वितीय भाव तन्त्रज्ञान की प्राप्ति एवं सफलता के सम्बन्ध में संकेत करता है। पंचम भाव इष्टदेव एवं साधना पद्धति को निर्धारित करता है। अष्टम भाव आध्यात्मिक-तान्त्रिक साधना के लिए आवश्यक विचारणीय भाव है। नवम भाव व्यक्ति की धर्म एवं तन्त्र के प्रति उसके झुकाव एवं प्रगति को दर्शाता है। एकादश भाव साधना में सफलता का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही, साधना से मनोकामना की पूर्ति को दर्शाता है।

ग्रह : शाबरमन्त्र साधना की दृष्टि से जन्मपत्रिका में गुरु का बली होना आवश्यक है। उसके साथ-साथ शनि का भी बली होना जरूरी है। सूर्य एवं चन्द्रमा पीड़ित नहीं होने चाहिए। अष्टम भाव में ग्रहों की उपस्थिति साधना की दृष्टि से उपयुक्त है।

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