योगविद्या और त्रिकाल दर्शन

Jyotish Sagar|February 2020

योगविद्या और त्रिकाल दर्शन
योग एक विशुद्ध भारतीय अध्यात्म विज्ञान की एक शाखा है। भारतीय योग विद्या की सहायता से प्राचीन सिद्धयोगी अनेक चमत्कारपूर्ण कार्य करते थे, जो जन सामान्य के लिए दुर्लभ थे।
डॉ. श्याम मनोहर व्यास

योग का शाब्दिक अर्थ है ‘जोडना'। साधना एवं प्राणायाम द्वारा स्वयं को ईश्वर, अदृश्य शक्तियों तथा त्रिकालदर्शिता की अनुभूतियों से जोड़ना ही 'योग' विद्या है।

योग उच्च कोटि का अध्यात्म विज्ञान है। उसकी विभिन्न पद्धतियाँ हैं, योग की क्रियाओं द्वारा अपनी अलौकिक शक्तियों को जाग्रत कर चमत्कारी कार्य किए जाते हैं। ये कार्य साधारण व्यक्तियों के लिए सम्भव नहीं हैं। जैसे; योग के बल पर भूमिगत समाधि लेना, पानी पर चलना, परकाया प्रवेश, अदृश्य होना, दूसरों के मन की बातें जान लेना एवं जड़ वस्तुओं में गति उत्पन्न कर देना इत्यादि। यद्यपि अभी तक उन्हें विज्ञान सम्मत तर्क की कसौटी पर कसा नहीं जा सका, पर ये कार्य प्रत्यक्ष अवश्य हैं।

योग साधना द्वारा तमोगुण का नाश होता है तथा सत्वगुण की वृद्धि होती है। योगी को योग विद्या द्वारा विभिन्न विभूतियों की उपलब्धि होती है। योग सिद्धि के लिए निरन्तर अभ्यास, श्रद्धा तथा आत्मविश्वास की आवश्यकता है। योग विद्या ही वह शक्ति है, जो स्थूल एवं सूक्ष्म जगत् के बीच सम्बन्ध स्थापित करती है। योगविद्या के चमत्कारी कार्यों को केवल कपोल कल्पना एवं अन्धविश्वास समझना मूर्खता एवं अज्ञानता का द्योतक है। उच्चकोटि के योगी साधना द्वारा ब्रह्म में लीन होकर अनिवर्चनीय आनन्द का अनुभव करते हैं। यह भी सच है कि सच्चे योगिजन साधारण के सामने अपने कार्यों का सार्वजनिक प्रदर्शन भी नहीं करते हैं।

कई अंग्रेज पर्यटकों ने भारत में योगियों के चमत्कारों को प्रत्यक्ष में आज भी कई देखा । उत्तराखण्ड चमत्कारी योगी निवास करते हैं । स्वयं लेखक ने इन योगियों से भेंट की है । एक योगी के मुझे अरावली की पहाड़ियों में मार्गदर्शन हुए थे, जिनकी आयु 102 वर्ष की थी, वे केवल कन्दमूल, फल एवं जल से ही अपना निर्वाह करते थे । उत्तराखण्ड स्थित गंगोत्री की एक गुफा में बाबा गंगादासजी भी ऐसे ही उच्चकोटि के योगी थे ।

योगी का अनोखा चमत्कार

हैरी राल्फ नामक अंग्रेजी पर्यटक के द्वारा देखे गए योग विद्या के चमत्कार का वर्णन इस प्रकार है :

नीलगिरि की पहाड़ियों में मुझे एक विचित्र योगी के दर्शन हुए। वह लंगोट बाँधे हुए पीठ के बल पर भूमि पर लेट गया। फिर एक फनल द्वारा उसके मुँह की राह चार गैलन पानी पहुँचाया गया। आश्चर्य! इतना पानी पी जाने पर भी उसका बाल बाँका न हुआ। इसके बाद वह वृद्ध योगी बायीं करवट सीधा लेट गया। उसने अपने दोनों हाथों की कोहनियों की जोड़ से मोड़कर मुँह के सामने कर रखा था। सीधे हाथ से उसके तीन फीट की छड़ी का सिरा पकड़ रखा था और छड़ी भूमि पर सीधी खड़ी कर रखी थी। तत्पश्चात् उस योगी को चटाई से ढंक दिया गया। दस मिनट पश्चात् चटाई हटा दी गई। दर्शक यह देखकर अवाक रह गए कि वह योगी जमीन से तीन फुट ऊँचाई पर अंगुलियाँ टिकाए-टिकाए उसी लेटने की स्थिति में खड़ा हुआ था।

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