मंथ प्लानर

Jyotish Sagar|March 2020

मंथ प्लानर
मंथ प्लानर

होलाष्टक प्रारम्भ (03 मार्च, 2020)

फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पौर्णमासी पर्यन्त आठ दिन होलाष्टक' कहे गए हैं। भारत के कई प्रदेशों में होलाष्टक शुरू होने पर एक पेड़ की शाखा काटकर उसमें रंग-बिरंगे कपड़ों के टुकड़े बाँधते हैं। इस शाखा को जमीन में गाड़ दिया जाता है। सभी लोग इसके नीचे होलिकोत्सव मनाते हैं। होलाष्टक में विवाहादि मंगलकार्य वर्जित हैं। वैसे तो सभी शुभकार्य वर्जित हैं, लेकिन विवाह विशेषरूप से वर्जित है।

आमला एकादशी व्रत (06 मार्च, 2020)

फाल्गुन शुक्ल एकादशी आमलकी एकादशी के नाम से जानी जाती है। इस दिन भगवान् विष्णु की पूजा आँवले के वृक्ष की छाँव में की जाती है।

व्रत कथा (संक्षेप में)

एक समय की बात है, वैदेशिक नगर में धर्मशील एवं परोपकारी चैत्ररथ नाम का राजा था। वह एकादशी का नियमित रूप से व्रत करता था। उत्साहपूर्वक उत्सव के रूप में एकादशी का व्रत किया जाता था। आमलकी एकादशी पर जब नगर में एकादशी व्रत सम्पन्न हो रहा था, तब पास के जंगलों से एक बाघ आकर उस व्रत को बड़े ध्यान से देखने लगा। बाघ ने बिना कुछ खाए-पीए सम्पूर्ण व्रत को देखा। पूजन, जप, कीर्तन, हरिस्मरण, भगवत् चर्चा आदि को देखने एवं सुनने से तथा अनायास उपवास करने और रात्रि जागरण करने से बाघ को आमलकी एकादशी के व्रत करने का पुण्य मिल गया। इसके प्रभाव से वह अगले जन्म में जयन्तिका का राजा हुआ।

शनि प्रदोष व्रत (07 एवं 21 मार्च, 2020)

भगवान् शिव की कृपा-प्राप्ति का यह प्रमुख पाक्षिक व्रत है। इस माह 07 मार्च एवं 21 मार्च को शनिप्रदोष व्रत पड़ रहा है। व्रती को प्रदोषकाल में स्नानादि से शुद्ध होकर भगवान् शिव का षोडशोपचार पूजन करना चाहिए। तदुपरान्त शिवाष्टक या शिव ताण्डव आदि स्तोत्रों से भगवान् शिव को प्रसन्न करना चाहिए। यथाशक्ति जप-तप-हवन इत्यादि करने चाहिए। शिवपूजन में अपना मुख दक्षिणाभिमुख नहीं रखना चाहिए। पूर्ण मनोयोग से किया गया यह व्रत पुत्र, धन, राज्य एवं सुख-समृद्धि को देने वाला है। इसके करने से मनुष्य सौ जन्मों में भी दरिद्री नहीं होता एवं ज्ञान और ऐश्वर्य से युक्त होता है। जो मनुष्य इस दुर्लभ मनुष्य शरीर को पाकर प्रदोष काल में शिवपूजन करते हैं, वे अन्त में शिवलोक को चले जाते हैं।

श्रीसत्यनारायण व्रत (09 मार्च, 2020)

पूर्णिमा पर भगवान् सत्यनारायण के लिए व्रत किया जाता है। इस दिन व्रती को स्नानादि से निवृत्त होने के पश्चात् सत्यनारायण व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए। तदुपरान्त एक चौकी पर लाल या पीला रेशमी वस्त्र बिछाकर उस पर मण्डलों की स्थापना करनी चाहिए। मध्य में अष्टदल कमल का निर्माण करके उस पर भगवान् विष्णु की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। तदुपरान्त गणेशाम्बिका सहित मण्डलस्थ देवताओं, ग्रहों आदि सहित भगवान् विष्णु की यथोपचार पूजा करनी चाहिए तथा सत्यनारायण व्रत-कथा का श्रवण करना चाहिए। इसके पश्चात् यथाशक्ति हरिनाम जप, हवन एवं ब्राह्मण भोजन करवाना चाहिए ।

होलिका दहन (09 मार्च, 2020)

फाल्गुन पूर्णिमा को होली मनायी जाती है। इस वर्ष यह 09 मार्च को पड़ रही है। इस दिन सायंकाल होलिका दहन किया जाता है। यह दहन हिरण्यकशिपु की बहन होलिका द्वारा भक्त प्रह्लाद को अग्निदाह करवाने का प्रयास करने तथा प्रह्लाद के ईश कृपा से बचने और होलिका के दहन के उपलक्ष्य में किया जाता है। होलिका दहन के समय गेहूँ और जौ की बालियाँ सेंकी जाती हैं और उनके 'होले' प्रसाद के रूप में खाए जाते हैं। इसे 'नव-शस्येष्टि' (नयी फसल के अनाज का सेवन करने के लिए किया गया यज्ञानुष्ठान) तथा मदनोत्सव अथवा वसन्तोत्सव भी कहा जाता है।

धुलण्डी (10 मार्च, 2020)

चैत्र कृष्ण प्रतिपदा धुलण्डी के रूप में मनायी जाती है। यह प्रेम और सौहार्द का त्योहार है। इस दिन लोग एक-दूसरे से मिलते हैं और अबीर-गुलाल-रंग लगाकर हृदय के उल्लास को प्रकट करने का प्रयास करते हैं। बसंत ऋतु में जहाँ प्रकृति रंगीन नजर आती है, वहीं मनुष्य के हृदय में हर्ष एवं उल्लास की रंगीनियाँ उत्पन्न होती हैं। धुलण्डी के दिन इन रंगीनियों को प्रकट किया जाता है। भारत के विभिन्न अंचलों में इस पर्व पर विशेष प्रकार के नृत्य, नृत्य-नाटिकाएँ एवं स्वांग किए जाते हैं। यह त्योहार समानता एवं भाईचारे का संदेश देता है तथा जीवन में हर्ष, उल्लास एवं प्रफुल्लता उत्पन्न करता है।

गणगौर पूजा प्रारम्भ (10 मार्च, 2020)

यह व्रत चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल द्वितीया तक किया जाता है। यह कुँवारी एवं विवाहिता दोनों प्रकार की स्त्रियों का व्रत है। इस व्रत के प्रारम्भ के दिन होली की भस्म और मिट्टी से गौरी की मूर्ति बनायी जाती है। प्रातःकाल स्त्रियाँ इसे किसी सरो- वर तट या उद्यान में ले जाकर पूजती हैं और मंगलगीत गाती हुई घर लौटती हैं। यह प्रक्रिया प्रत्येक दिन की जाती है। राजस्थान में इस त्योहार की विशेष मान्यता है। जयपुर में गणगौर की सवारी निकलती है और मेला भरता है। यह व्रत कुँवारियों द्वारा अच्छे पति की कामना के उद्देश्य से तथा विवाहिताओं द्वारा अखण्ड सौभाग्य एवं पति के प्रेम की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

चती व्रत (12 मार्च, 2020)

12 मार्च, 2020 को चैत्र कृष्ण चतुर्थी पड़ रही है। इस दिन भगवान् गणेश के निमित्त चतुर्थी व्रत किया जाता है। व्रती को प्रातःकाल चतुर्थी व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए। तदुपरान्त स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान् गणेश का षोडशोपचार पूजन करना चाहिए। इस दिन उपवास रखना चाहिए। सायंकाल भगवान् गणेश की पुनः पूजा करके व्रत- कथा का श्रवण करना चाहिए। रात्रि में चन्द्रमा का दर्शन करके उसे अर्घ्य देकर ब्राह्मण भोजन करवाना चाहिए, तदुपरान्त स्वयं भोजन करना चाहिए।

व्रत-कथा

प्राचीनकाल की बात है एक बहुत धर्मशील शासक था, जिसका नाम था मयूरध्वज। वह प्रजाहितैशी, जनकल्याणकारी एवं शास्त्रों के वचनानुसार राज्य करने वाला था। एक बार की बात है कि मयूरध्वज का पुत्र कहीं खो गया। काफी प्रयास करने के उपरान्त भी उसे ढूँढ़ा न जा सका, तब मन्त्री की पुत्रवधू जो कि भगवान गणेश की उपासक थी, ने मन्त्री के माध्यम से राजा को परामर्श दिलावाया कि संकट आने पर चतुर्थी व्रत का विधान है। यदि राजा चतुर्थी का व्रत करे, तो पुत्र गुम जाने के विकट संकट से मुक्ति मिल सकती है अर्थात् राजकुमार वापस घर लौट सकते हैं। राजा ने मन्त्री की पुत्रवधू का परामर्श मानकर विधि-विधान एवं पूर्ण उत्साह और आस्था के साथ सपरिवार चैत्र कृष्ण चतुर्थी का व्रत किया। व्रत के प्रताप से और भगवान गणेश की अनुकम्पा से राजकुमार की घर वापसी हुई। इस प्रकार संकट में पड़े व्यक्ति यदि गणेश चतुर्थी का व्रत करें, तो संकट से मुक्ति सम्भव है।

शीतलाष्टमी (16 मार्च, 2020)

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