सात साल तीन महीना तीन दिन बाद इंसाफ
सात साल तीन महीना तीन दिन बाद इंसाफ
राजधानी दिल्ली में निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या के बाद पूरा देश आंदोलित हो उठा था. देश के कोने-कोने से एक ही मांग उठ रही थी कि निर्भया को इंसाफ मिले और उसके गुनहगारों को फांसी दी जाये.आखिरकार, सात साल तीन महीने तीन दिन बाद वह वक्त आ गया है

निर्भया के छह गुनहगार

पवन गुप्ता

पवन का परिवार यूपी के बस्ती जिले के लालगंज थाने के जगन्नाथपुर गांव से दिल्ली आकर बसा था. वह फल व जूस बेचने का काम करता था. पवन दिल्ली में ही पैदा हुआ. उसका परिवार गांव में नया मकान बनवा रहा था, लेकिन इस कांड के बाद से काम रुक गया और निर्माणाधीन घर अब खंडहर जैसा हो चुका है. वारदात के समय पवन की उम्र 19 साल थी. उसकी ओर से खुद के नाबालिग होने का दावा किया गया था, जो अदालत में खारिज हो गया.

अक्षय ठाकुर

स्कूली पढ़ाई बीच में ही छोड़ अक्षय कुमार सिंह उर्फ अक्षय ठाकुर बिहार से दिल्ली आया था. उसका परिवार औरंगाबाद जिले के टंडवा थाने के लहंगकर्मा गांव में रहता है. घर में मां-बाप, भाई, पत्नी और सात साल का बेटा है. उसके दो भाई विनय और अभय भी दिल्ली में काम करते थे, लेकिन इस घटना के बाद दोनों की नौकरी छूट गयी. अभी दोनों गांव में मजदूरी कर रहे हैं. वारदात के समय अक्षय की उम्र 28 साल थी और वह बस में खलासी का काम करता था.

मुकेश सिंह

वारदात के समय मुकेश की उम्र 22-23 साल थी. वह मुख्य आरोपी राम सिंह का छोटा भाई था और अन्य आरोपियों की तरह ही दक्षिण दिल्ली के आरके पुरम स्थित रविदास कैंप में ही, दो कमरों की एक झुग्गी में बड़े भाई के साथ रहता था. वह बीच-बीच में गाड़ी चलाने का काम करता था. आरोप है कि वारदात के दिन गाड़ी मुकेश ही चला रहा था. वह शराब और झगड़े-झमेले में अक्सर ही बड़े भाई का साथी रहता था. इलाके में वह खासा बदनाम था.

विनय शर्मा

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March 20, 2020

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