धीमी रफ्तार से हो रही धान की खरीद
Business Standard - Hindi|October 07, 2020
धीमी रफ्तार से हो रही धान की खरीद
हरियाणा के किसान सुस्त खरीद से खफा हैं। उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान से धान की आवक को लेकर भी चिंतित हैं
नितिन कुमार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामिल जिले के किसान सतीश सिंह को जब पता चला कि कृषि विधेयकों को राष्ट्रपति मंजूरी मिल गई है तो वह अपनी उपज बेचने के लिए हरियाणा गए। लेकिन हरियाणा सरकार ने उन्हें वहां अपनी उपज बेचने की मंजूरी नहीं दी, इसलिए वह खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

सिंह ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने कहा कि ये विधेयक फसलों के मुक्त कारोबार के लिए हैं, लेकिन हमें हरियाणा सरकार क्यों रोक रही है? हम हरियाणा इसलिए जाते हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार कभी हमारी उपज नहीं खरीदती है। हम हर साल 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाकर निजी खरीदारों को अपनी उपज बेचते हैं।'

सिंह जैसे बहुत से किसानों ने कहा कि हरियाणा सरकार का फैसला बहुत अनुचित था और यह किसानों को कहीं भी उपज बेचने के अपने अधिकार से वंचित कर देगा। न केवल उत्तर प्रदेश के किसान बल्कि हरियाणा के किसान भी सरकार की फसल खरीदने की सुस्त रफ्तार से खफा हैं। करनाल के एक किसान रामपाल मुले ने कहा, 'मैं पिछले कई दिनों से उपज बेचने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहा हूं, लेकिन किसी ने अभी तक मेरा एक किलोग्राम धान भी नहीं खरीदा है।' उन्होंने कहा, 'हरियाणा में 80 फीसदी विधायक किसान हैं, लेकिन एक भी हमारी दिक्कत के बारे में बात नहीं कर रहा है।'

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति अतिरिक्त सचिव पी के दास ने जानकारी दी है कि हरियाणा के आठ जिलों में खरीद प्रक्रिया चल रही है। इन जिलों में सरकारी एजेंसियों और राइस मिलर ने 1 अक्टूबर तक केवल 11,895 टन धान खरीदा है, जबकि 26 सितंबर तक कुल 45,000 टन की आवक हुई है।

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