भारत के थिंक टैंक के लिए एफसीआरए की चुनौती
Business Standard - Hindi|September 25, 2020
भारत के थिंक टैंक के लिए एफसीआरए की चुनौती
गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2015 में 375, साल 2017 में 164 और 2019 में 68 अन्य संगठनों की एफसीआरए मान्यता रखत्म कर दी गई
रुचिका चित्रवंशी और शुभायन चक्रवर्ती

बुकिंग्स इंडिया ने 10 सितंबर को यह ऐलान किया कि अब वह एक स्वतंत्र लोक नीति थिंक टैंक 'सेंटर फॉर सोशल ऐंड इकनॉमिक प्रोग्रेस' (सीएसईपी) के तौर पर जाना जाएगा। अमेरिका स्थित बुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के साथ सात वर्ष पुराना रिश्ता खत्म होने के बाद उसने नया नाम धारण करने का फैसला किया है।

वर्ष 2013 में भारत में कदम रखने वाले बुकिंग्स इंस्टीट्यूशन का संक्षिप्त कार्यकाल एक अहम सवाल खड़ा करता कि क्या विदेशी थिंक टैंक को भारत अब पहले जैसा आकर्षित नहीं करता है

बुकिंग्स इंडिया के कार्यकारी चेयरमैन रहे विक्रम सिंह मेहता अब सीएसईपी के प्रतिष्ठित फेलो बन चुके हैं। उन्होंने बताया कि बुकिंग्स ने चीन एवं दोहा समेत तमाम विदेशी बाजारों में अपने ट्रेडमार्क का इस्तेमाल बंद कर दिया है। मेहता कहते हैं, 'बुकिंग्स अब केवल अमेरिकी बाजार पर ही केंद्रित रहना चाहता है। हमने अपने अलग ब्रांड विकसित करने और वेबसाइट बनाने में कड़ी मेहनत की है। सीएसईपी का यही कहना है कि बुकिंग्स इंडिया की विदाई एक वैश्विक रणनीति का हिस्सा है लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बात इतनी सीधी नहीं है। घटनाक्रम से परिचित लोगों के मुताबिक, थिंक टैंक के लिए विदेश से फंडिंग जुटाना एक बड़ी चुनौती बन चुका है और भारत के विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) के सख्त प्रावधान काफी हद तक इसके लिए जिम्मेदार हैं।

गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में स्थित 375 संस्थानों का एफसीआरए पंजीयन वर्ष 2015 में समाप्त कर दिया गया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुआई वाले गठबंधन के सत्ता में आने के एक साल बाद ही इन संगठनों का पंजीकरण खत्म हुआ था। उसके बाद 2017 में 164 और 2019 में 68 अन्य संगठनों की एफसीआरए मान्यता खत्म कर दी गई।

इस बारे में जब गृह मंत्रालय का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो बिज़नेस स्टैंडर्ड की तरफ से भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं मिला।

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