केजरीवाल की नयी राजनीतिक ताकत का सबब

Uday India Hindi|February 16, 2020

केजरीवाल की नयी राजनीतिक ताकत का सबब
केजरीवाल को मिला स्पष्ट बहुमत किसी नये ध्रुवीकरण का संकेत दे रहा है। जो-जो मुद्दे सभी राजनैतिक दलों ने उठाये, वे मोटे रूप में चुनावी थे। अब सभी दलों को पूर्वाग्रह छोड़ देना चाहिए। अन्यथा देश की राजनीति को बहुत दूर तक नहीं ले जा सकेंगे। हमारा राष्ट्रीय जीवन विविधता की एक चुनरी है। उसके इस रूप को खूब ठण्डे दिमाग से समझना होगा व सुरक्षित रखना होगा। अब तक का इतिहास बताता है कि देश की जनता ने एकदम बायां या एकदम दायां कभी स्वीकार नहीं किया। न नेता के रूप में न ही नीति के रूप में।
ललित गर्ग

अरविन्द केजरीवाल दिल्ली के तीसरी बार शानदार एवं करिश्माई जीत के बाद मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। वे सौम्य, चतुर व करिश्माई कर्मयोद्धा व्यक्तित्व के आम आदमी जैसे दिखने वाले राजनेता हैं। हो सकता है कि आज जब दिल्ली एक कठिन दौर से गुजर रही है, तब नियति अपना करिश्मा ऐसे ही सादे व्यक्तित्व वाले मुख्यमंत्री के माध्यम से दिखाना चाहती है। उधर दिल्ली की जनता ने इस बार विधानसभा चुनाव में जो जनादेश दिया है उसको सब अलग-अलग रूप में देख रहे हैं। समीक्षक अपने-अपने चश्मे के अनुसार विश्लेषण कर रहे हैं। पर एक बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई है कि संकुचित मानसिकता एवं साम्प्रदायिकता को दिल्ली की जनता ने सदैव की तरह इस बार भी स्वीकार नहीं किया। केजरीवाल शुरू से चाहते थे कि दिल्ली की जनता राष्ट्रीय मुद्दों को एक तरफ रखकर दिल्ली के मुद्दों पर वोट करें और अपनी इस रणनीति में वह कामयाब हुए और ऐतिहासिक तरह से जीते।

लगता है केजरीवाल को मिला स्पष्ट बहुमत किसी नये ध्रुवीकरण का संकेत दे रहा है। जो-जो मुद्दे सभी राजनैतिक दलों ने उठाये, वे मोटे रूप में चुनावी थे। अब सभी दलों को पूर्वाग्रह छोड़ देना चाहिए। अन्यथा देश की राजनीति को बहुत दूर तक नहीं ले जा सकेंगे। हमारा राष्ट्रीय जीवन विविधता की एक चुनरी है। उसके इस रूप को खूब ठण्डे दिमाग से समझना होगा व सुरक्षित रखना होगा। अब तक का इतिहास बताता है कि देश की जनता ने एकदम बायां या एकदम दायां कभी स्वीकार नहीं किया। न नेता के रूप में न ही नीति के रूप में। वर्तमान चुनावों का जनादेश भी यही दूरदर्शिता लिए हुए है। दिल्ली की आवाज दूर तक जाती है और इस बार भी जाएगी। केजरीवाल ने जो करिश्मा किया है, वह सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रह सकता। इसलिए कि उनके मुकाबले में अमित शाह खुद उतर आए, बीजेपी के नए अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने दिल्ली की गलियों की खाक छानी और पीएम नरेंद्र मोदी भी रैलियों में उतरे। उसके बावजूद अगर बीजेपी की यह गत बनी है और उसकी करारी हार हुए है तो फिर इस आवाज के दूर तक जाने के कारण भी बनते हैं। लगता है केजरीवाल की जीत देश की राजनीति को एक नयी दिशा एवं नया धरातल देंगी।

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February 16, 2020