दिल्ली को इस्लामाबाद बनाना चाहते हैं शाहीनबागी

Uday India Hindi|March 07, 2020

दिल्ली को इस्लामाबाद बनाना चाहते हैं शाहीनबागी
दिल्ली के शाहीन बाग में धरना चलते हुए 2 महीनों से अधिक का वक्त बीत चुका है। इतने वक्त में दिल्ली ने बहुत कुछ सहा है। दिल्ली की हालत और हालात पर कभी फिर बात करेंगे, आज बात शाहीनबागियों की।
उमेश उपाध्याय

आखिर शाहीन बाग में सड़क पर बैठे लोगों की मंशा क्या है? यह चाहते क्या हैं? इस पर थोड़ा विस्तार से गौर करने की आवश्यकता है। दिल्ली ने इस तरह के धरने पहले कभी नही देखे। पर हमारे पड़ोसी पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों में यह आम बात हो गई है। पाकिस्तान में सरकार से अपनी बात मनवाने के लिए कट्टर जिहादी तत्व इस तरह के धरने लंबे समय से देते आए हैं।

तहरीक-ए-लब्बैक नाम के संगठन ने 2018 में धरना दे कर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को पंगु बना दिया था। 2017 में भी तहरीक-ए-लब्बैक उर्फ रसूल अल्लाह ने एयरपोर्ट और रावलपिंडी जाने वाले इस्लामाबाद एक्सप्रेस वे और मुर्गी रोड को जाम कर दिया था। दोनों ही धरनों के बाद तत्कालीन पाक सरकारों ने उनकी बातें मानी थी। एक बार तो एक केंद्रीय मंत्री तक को हटा दिया गया था। इन प्रदर्शनकारियों के सिर पर पाकिस्तानी फौज का हाथ बताया जाता है। जो पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार से हिसाब चुकता करने के लिए इस तरह के कट्टर जिहादी संगठनों को खुले आम बढ़ावा देती है। यहां तक कि पाक फौज के आला अफसर तहरीक-ए-लब्बैक के लोगों को पैसे बांटते हुए तक पाए गए गए थे। तहरीक-ए-लब्बैक के खादिम हुसैन रिजवी के तरीकों को कुछ लोग अब हिंदुस्तान में आजमा रहे हैं। ये भी भारत की चुनी हुई सरकार को ना मानने पर अड़े हैं।

आप कहेंगे कि इस्लामाबाद और दिल्ली के धरनों में क्या समानता है। दोनों में खास बात यह है कि बुनियादी तौर पर दोनों धरने वहां कि विधि सम्मत स्थापित सरकारों के खिलाफ हो रहे थे। पाकिस्तान में तो धरने नवाजशरीफ सरकार के खिलाफ हुए थे पर दिल्ली में धरना भारत की संसद द्वारा लंबी बहस के बाद बहुमत से पारित एक कानून को बदलवाने के लिए हो रहा है। दिल्ली और इस्लामाबाद के धरने जोर जबर्दस्ती से अपनी बात मनवाने की रणनीति है। यह सीधे-सीधे ब्लैकमेलिंग है। 'हम जो चाहते हैं वैसा करो' और 'अगर वैसा नहीं होगा' तो हम आम जनजीवन को ठप्प कर देंगे। जोर जबरदस्ती से सरकार को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर देंगे। यानी कानून द्वारा स्थापित व्यवस्था को नहीं मानेंगे, जरूरत पड़ी तो हिंसा पर भी उतारु होंगे।

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March 07, 2020