कांग्रेस का कमजोर नेतृत्व नहीं संभाल पा रहा अपनी 'किटी'

Uday India Hindi|March 07, 2020

कांग्रेस का कमजोर नेतृत्व नहीं संभाल पा रहा अपनी 'किटी'
मध्य प्रदेश निकला तो राजस्थान भी निकल जायेगा हाथों से

जिन परिस्थितियों में मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने इधर-उधर से विधायक जुटा कर सरकार बनायी उसके गिरने का खतरा सदा मंडराता रहेगा। पार्टी से बाहर के विधायक तो किसी न किसी प्रलोभन में साथ रहेंगे लेकिन उनसे ज्यादा खतरा तो पार्टी को खुद अपने विधायकों से है। जो मंत्री नहीं बनाये गये हैं या जो खुद कांग्रेस के अन्दर मुख्यमंत्री कमलनाथ के विरोधी नेताओं के रुप में है, जब कमलनाथ को पार्टी हाइकमान ने मुख्यमंत्री बनाया था तब प्रदेश के महत्वपूर्ण नेताओं, जिनके साथ कुछ न कुछ विधायक हैं ने दबी आवाज से विरोध किया था।

मुख्यमंत्री के प्रमुख दावेदार और कई बार मंत्री रहे कांग्रेस के एक समय प्रधानमंत्री पद के दावेदार अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह राहुल के चुनाव हार जाने से कमलनाथ की लाटरी खुल गयी अन्यथा की स्थिति में शायद वे ही मुख्यमंत्री बनते। दिग्विजय सिंह को तो उनका समर्थन करना ही पड़ता और हाईकमान के करीबी माने जाने वाले नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को कमलनाथ को रोकने के लिये राहुल का ही साथ देना पड़ता। उनके चुनाव हारने के बाद दिग्विजय सिंह और सिंधिया ही प्रमुख दावेदार बचे थे। दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश में अपनी साख खो चुके हैं और उनके ऊल-जुलूल वक्तव्यों ने कई बार पार्टी की किरकिरी भी करायी है इधर सिंधिया उन्हें हाईकमान से दूर करने में सफल भी रहे हैं।

सिंधिया का राहुल और प्रियंका वाड्रा के नजदीक होना इससे ही पता चलता है कि उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका दी गयी। चूंकि दिग्गी और सिंधिया में 36 का आंकड़ा है। वे एक दूसरे को फूटी आंख नहीं देख सकते इसके कई कारण है। दोनों का राजनीति का और चुनाव लड़ने का क्षेत्र एक ही है। उसी क्षेत्र के सिंधिया महाराजा रह चुके हैं जहां दिग्विजय सिंह के पूर्वजों की एक छोटी सी स्टेट सिंधिया के मातहत रही है। यही कारण है कि कमलनाथ के समर्थन में कांग्रेस के कम विधायकों की सहमति होते हुये भी वे मुख्यमंत्री बन गये।

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March 07, 2020