ड्रग्स के चक्रव्यूह में दीपिका पादुकोण
Sarita|October Second 2020
ड्रग्स के चक्रव्यूह में दीपिका पादुकोण
फिल्म इंडस्ट्री में कलाकार और विवाद मानो एक सिक्के के दो पहलू हैं. इन दिनों आम लोगों से ले कर सोशल मीडिया और सरकारी तंत्र तक बौलीवुड सितारों को खासा आड़ेहाथों लेते नजर आ रहे हैं. चर्चित अभिनेत्री दीपिका पादुकोण भी इन सब की रडार पर हैं.
शांतिस्वरूप त्रिपाठी

अकसर देखा गया है कि बौलीवुड में गायक, संगीतकार, अभिनेता, निर्देशक वगैरह बन कर विश्व में छा जाने के बड़ेबड़े सपने ले कर ज्यादातर लोग अपने परिवार या समाज के बीच बड़ेबड़े दावे कर के या परिवार के विरोध के बावजूद मायानगरी मुंबई पहुंचते हैं. उन के स्वभाव में हार मानना नहीं होता. ऐसे में ये लोग अपनी मेहनत, परिश्रम, लगन के बल पर संघर्ष करना शुरू करते हैं. उन के अंदर की प्रतिभा और मेहनत करने का जज्बा उन्हें सफलता भी दिलाता है. लंबे संघर्ष के बाद जब सफलता मिलती है, तो उस का नशा भी उतना ही बड़ा होता है.

बौलीवुड में सफलता के इस नशे को पचा कर अपनी जड़ों यानी जमीनी हकीकत से जुड़ा रहना असंभव होता है. वास्तव में बौलीवुड में इंसान को जिस स्तर की शोहरत आदि मिलती है, उस के चलते उस की जिंदगी में काफीकुछ ऐसा होता है जिस की उस ने कल्पना नहीं की होती है. और फिर, वह डिप्रैशन की तरफ बढ़ता जाता है. ऐसा ही कुछ दीपिका पादुकोण के साथ हुआ. एक तरफ उन्हें सफलता मिलती रही, तो दूसरी तरफ वे विवादों की रानी बनती चली गईं. फिर डिप्रैशन में चली गई और अब तो नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में ड्रग्स के मामले में उन पर शिकंजा भी कसता जा रहा है.

बैंडमिंटन कोर्ट से बौलीवुड स्टार

मशहूर अंतर्राष्ट्रीय शोहरत बटोर चुके बैंडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण की डेनमार्क में जन्मी बेटी दीपिका पादुकोण शुरुआती दिनों में बैंडमिंटन खिलाड़ी बनना चाहती थीं. 17 वर्ष की किशोरावस्था में उन का बैंडमिंटन कोर्ट से मोह भंग हो गया और मातापिता से झगड़ कर ग्लैमर की दुनिया से जुड़ने के लिए बेंगलुरु से मुंबई पहुंच गईं. वहां पहुंचते ही उन्हें कुछ विज्ञापन फिल्में मिल गईं.

2005 में हिमेश रेशमिया ने उन्हें म्यूजिक वीडियो 'नाम है तेरा' का हिस्सा बना दिया. यह म्यूजिक वीडियो इस कदर लोकप्रिय हुआ कि 2006 में इंद्रजीत लंकेश ने दीपिका को कन्नड़ भाषा की फिल्म 'ऐश्वर्या' में अभिनय करने का मौका दे दिया. उस के बाद 2007 में शाहरुख खान ने अपनी प्रोडक्शन की फराह खान निर्देशित फिल्म 'ओम शांति ओम' में दीपिका पादुकोण को अभिनय करने का अवसर दिया. इस फिल्म में शाहरुख खान ने स्वयं दीपिका पादुकोण के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी.

उसी वर्ष संजय लीला भंसाली की फिल्म 'सांवरिया' भी आई थी, जिस में पहली बार सोनम कपूर और रणबीर कपूर ने अभिनय किया था. दोनों फिल्में एक ही दिन प्रदर्शित हुई थी. पर समय की बलवान दीपिका पादुकोण की फिल्म 'ओम शांति ओम' ने बौक्सऔफिस पर जबरदस्त सफलता दर्ज कराई और दीपिका बौलीवुड स्टार कलाकार बन गईं. उस के बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा.

लगभग 15 वर्षों के कैरियर में एक तमिल, एक कन्नड़, एक अमेरिकी फिल्म सहित 32 फिल्मों में वे अभिनय कर चुकी हैं. हर फिल्म में उन्होंने अलगअलग किरदारों को निभाया है. फिर चाहे वह रोमांटिक किरदार हो, डबल रोल, ऐक्शन हो या स्पैशल अपीयरेंस वाला. पर उन्हें प्रेमकहानी वाली फिल्मों में सर्वाधिक पसंद किया गया. वैसे, उन्होंने 2 पीरियड फिल्में भी की.

विवादों की रानी

शुरुआती सफलता के बाद उन की महत्त्वाकांक्षाएं कुछ ज्यादा ही बढ़ गईं. वे धीरेधीरे बौलीवुड के रंग में रंगती चली गईं जहां इंसानी मूल्यों, पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक मूल्यों के कोई माने नहीं हैं. नतीजतन, धीरेधीरे उन के क्रियाकलापों ने उन्हें 'विवादों का दूसरा नाम' की संज्ञा दे डाली. दीपिका भी अपनी हर फिल्म के साथ या उस के प्रदर्शन के दौरान विवादों को जन्म देने लगीं. कभी वे रणबीर कपूर के टैटू को गुदवाने को ले कर विवादों में रहीं, तो कभी सिद्धार्थ माल्या संग लिपलौक करने के कारण. कभी क्लीवेज वाली फोटो के चलते विवादों में रहीं, तो कभी 'दम मारो दम...' गाने को ले कर. इतना ही नहीं, धीरेधीरे उन्होंने अपनी छवि हिंदूविरोधी बना डाली.

उन की 2 सर्वाधिक सफल फिल्मों, जिन के निर्देशक संजय लीला भंसाली रहे, पर उठे विवादों से उन की छवि हिंदूविरोधी बन गई. सब से पहले फिल्म 'रामलीला' को ले कर विवाद उठा कि इस में हिंदू धर्म व संस्कृति के खिलाफ बात की गई है. फिल्म के नाम पर भी एतराज जताया गया. आखिरकार, मजबूरन फिल्म का नाम बदल कर 'गोलियों की रासलीला: राम लीला' करना पड़ा. इस के बाद फिल्म 'पद्मावत' को ले कर हिंदू संगठनों व करणी सेना ने विरोध किया. इस फिल्म पर भी इतिहास से छेड़छाड़ करने व हिंदूविरोधी होने के आरोप लगे थे. बड़ी मुश्किल से ये फिल्में प्रदर्शित हो पाई थीं.

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