क्यों है पुरुषों को हार्ट अटैक का अधिक जोखिम
Sarita|October Second 2020
क्यों है पुरुषों को हार्ट अटैक का अधिक जोखिम
तेज रफतार जिंदगी, बदलती जीवनशैली व गलत खानपान ने इंसान के हार्ट को खासा नुकसान पहुंचाया है. भारत में हार्ट संबंधी समस्या पश्चिमी देशों की तुलना में अधिक बढ़ने लगी है. युवाओं में भी अब हार्टअटैक कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रहा है.
डा. रोहित गोयल

भारत में हृदय रोगों के आंकड़े बढ़ रहे हैं. देखा गया है कि भारतीयों को हार्ट अटैक की शिकायत पश्चिमी आबादी से करीब एक दशक पहले हो जाती है. इस के अलावा, , भारतीयों में हृदयरोग संबंधी जटिलताएं व गंभीरता भी यहां उपलब्ध कमजोर चिकित्सा सेवाओं व इलाज लेने में देरी के चलते अधिक होती हैं.

कई अध्ययनों से यह स्पष्ट हो चुका है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों को हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा अधिक होता है, जबकि दोनों में मधुमेह और उच्च रक्तचाप का जोखिम बराबर है. इंडियन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, 'भारतीय पुरुषों में 50 प्रतिशत हार्टअटैक 50 साल की उम्र से पहले और 25 प्रतिशत हार्ट अटैक 40 साल से कम उम्र में होता है.'

हार्टअटैक का कारण आमतौर पर कोरोनरी हार्ट रोग होता है जिस में हृदय की मांसपेशियों में औक्सीजनयुक्त रक्त का प्रवाह अचानक अवरुद्ध हो जाता है और परिणामस्वरूप हृदय को औक्सीजन नहीं मिल पाती. इस का कारण कोरोनरी आर्टरी की भीतरी सतह पर कोलेस्ट्रोल का जमाव है. कोलेस्ट्रोल की इस परत का जमाव कई सालों तक होता है.

आसान शब्दों में, हार्टअटैक तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह रुक जाता है, जोकि लंबे समय से चली आ रही दिल की बीमारी या खराब जीवनशैली, खानपान, मोटापा और तनाव के कारण होता है.

पुरुषों में हार्टअटैक के बढ़ते मामलों के जो कई कारण हैं, उन में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है हार्मोनल स्तर. ऐसा देखा गया है कि प्रीमीनोपोजल महिलाओं में एस्ट्रोजन के स्तर को सुरक्षा प्रदान करते हैं और ऐसे में महिलाओं में दिल के रोग मीनोपौज के बाद बढ़ते हैं और कमोबेश पुरुषों के समान हो जाते हैं.

इस के अलावा, एक और पहलू है महिलाओं और पुरुषों दोनों में तनाव का स्तर. शुरू में यह माना जाता था कि महिलाओं के मुकाबले पुरुषों को काम के मोरचे पर ज्यादा तनाव होता है जिस की वजह से उन में हार्टअटैक के मामले भी अधिक होते हैं, लेकिन हाल के समय में देखा गया है कि औरतें भी अपने कार्यक्षेत्रों में अधिक तनावजनित व गंभीर किस्म की भूमिकाओं में सक्रिय हैं, ऐसे में यह फर्क अब मिटने लगा है. अलबत्ता, दोनों में तनाव को सहने की क्षमता अलग होती है.

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