बलात्कार कानून बदलाव की जरुरत
Sarita|October First 2020
बलात्कार कानून बदलाव की जरुरत
बलात्कार निसंदेह महिलाओं के प्रति एक घृणित अपराध है लेकिन आजकल ऐसे बलात्कारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जिन में सहमति से संबंध बनते हैं और अदालतें बिना वास्तविकता पर विचार किए आरोपी को जेल भेज देती हैं. यह कैसी ज्यादती है, इस पर पढ़िए यह खास रिपोर्ट.
भारत भूषण

बीती 5 सितंबर को बलात्कार के एक मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने जो अजीबोगरीब फैसला सुनाया है वह हैरानी के साथ चिंता पैदा करने वाला भी इस लिहाज से है कि इसे न्याय कहा जाए या अन्याय माना जाए. बलात्कार की परिभाषा और बलात्कार की सजा को ही कठघरे में खड़ा करते इस और देशभर की अदालतों में चल रहे ऐसे लाखों मामलों को समझें तो लगता है कि इन में सिरे से बदलाव की जरूरत है और ऐसा कहने की पर्याप्त वजहें व आधार भी हैं.

चर्चित मामला इंदौर के नजदीक देवास जिले का है जिस में आरोपी और पीड़िता साल 2017 में संपर्क में आए और लिवइन में रहने लगे. आरोपी ने पीड़िता से शादी का वादा किया जिस के चलते पीड़िता, जो शादीशुदा थी, ने अपने पति से जनवरी 2020 में तलाक ले लिया. तलाक के बाद रास्ता साफ हो जाने से उस ने आरोपी को शादी का उस का वादा याद दिलाया, तो वह मुकर गया. पीड़िता ने सीधे थाने का रुख किया और बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस के बाद की कहानी भी ऐसे लाखों मुकदमों की तरह जानीपहचानी है कि आरोपी को पुलिस ने जेल भेज दिया. उस ने जिला अदालत में जमानत की अर्जी दी जोकि उम्मीद के मुताबिक खारिज हो गई.

इस पर आरोपी ने इंदौर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मामले में दिलचस्प मोड़ तब आया जब अदालत ने अपने अनूठे फैसले में कहा कि आरोपी को इस शर्त पर अस्थायी जमानत दी जाती है कि वह पीड़िता से शादी कर ले और 2 महीने के भीतर इस के दस्तावेजी सुबूत भी पेश करे तो उस की जमानत स्थायी हो जाएगी. इस बाबत तुरंत ही आरोपी और पीड़िता ने अपनीअपनी रजामंदी भी दे दी.

इस स्वभाव के दूसरे कुछ मामलों पर नजर डालने से पहले इस फैसले को समझें तो पहली नजर में यह बड़ा भला फैसला प्रतीत होता है जिस का कानून या उस की धाराओं से दूरदूर तक कोई लेनादेना नहीं क्योंकि बिना ट्रायल के ही आरोपी को आरोपी मान लिया गया है. सहज ज्ञान आरोपी को भी मिल गया है कि सालोंसाल जेल में सड़ने और अदालतों के चक्कर काटने से तो बेहतर है कि वादा किया हो या न किया हो, पीड़िता से शादी कर जंजाल से छुटकारा पा लिया जाए, बाद में जो होगा, देखा जाएगा.

एक बात यह भी इस मामले से साबित होती है कि अगर अदालतें बतौर सजा विकल्प कथित आरोपी के सामने रखेंगी तो वे आसान रास्ता ही चुनेंगे जैसा कि बहुचर्चित अवमानना के मामले में देश के मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने एक रुपए का जुर्माना भरने का चुना और जता दिया कि असमंजस में वे नहीं, बल्कि सब से बड़ी अदालत थी जो मार दिया जाए या छोड़ दिया जाए की तर्ज पर कोई निर्णय नहीं ले पा रही थी.

और भी हैं मामले

बलात्कार के मामलों में अब आम लोगों की राय यह बनती जा रही है कि वे अकसर होते नहीं हैं बल्कि अदालतें उन्हें हुआ मान लेती हैं. खासतौर से उन मामलों में जिन में परी और राक्षसों के किस्सेकहानियों की तरह यह बात आ जाती है कि आरोपी ने शादी का झांसा या प्रलोभन देते बेचारी महिला यानी पीड़िता का महीनों या सालों शारीरिक शोषण यानी बलात्कार किया लेकिन पीड़िता को इस बलात्कार का एहसास तभी हुआ जब आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया. इस के पहले उस की समझ कहां घास चरने चली गई थी और उस ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की. अच्छी बात यह है कि इस पर न केवल आम लोग बल्कि अदालतें भी कभीकभार सोचने लगी हैं. इस के पहले ऐसे कुछ मामलों पर गौर करने से समझ आता है क्यों लोगों की धारणा बलात्कार के बारे में बदल रही है और इस का जिम्मेदार कौन है.

• 12 सितंबर को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से गुरुग्राम में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने आई 28 वर्षीय युवती की दोस्ती फेसबुक के जरिए फरवरी में लाजपतनगर में रहने वाले युवक अनमोल अलरिजा से हुई. यह युवती गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-3 में किराए के मकान में रहती है. जल्द ही दोनों मिलनेजुलने लगे और प्यार भी हो गया और फिर शारीरिक संबंध भी दोनों के बीच बने.

• 12 सितंबर को डीएलएफ फेज-3 थाने में पीड़िता ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि आरोपी ने शादी का झांसा दे कर जबरन शारीरिक संबंध बनाए थे. अगस्त के महीने में उस ने अनमोल से शादी करने को कहा तो वह मुकर गया. शिकायत पर कार्रवाई करते पुलिस ने आरोपी को पकड़ने की कोशिश की लेकिन वह फरार हो गया. जाहिर है गिरफ्तारी के बाद उसे लंबे वक्त तक जेल में रहना पड़ेगा क्योंकि बलात्कार के मामलों में जमानत आसानी से नहीं होती.

• छत्तीसगढ़ के सिहावा नगरी की रहने वाली एक आदिवासी युवती ने थाना सिहावा में 21 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज कराई कि रोशन लाल साहू नाम के युवक से उस की पहचान साल 2018 में हुई थी. रोशन लाल ने उसे शादी का झांसा दे कर शारीरिक संबंध बनाए लेकिन शादी की नहीं. इतना ही नहीं, वह युवती को बदनाम करने की धमकी देते उस से शारीरिक संबंध बनाता रहा. रिपोर्ट के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. अब जमानत कब होगी, यह जेल की अंधेरी कोठरी में रह रहे रोशन लाल को नहीं पता.

• रोशन लाल की तरह मोहम्मद असलम भी दुमका की सैंट्रल जेल में बंद है. झारखंड के रानेश्वर की एक महिला, जो 2 बच्चों की मां है, ने उस पर बलात्कार का आरोप लगाया है. बकौल पीड़िता, असलम ने उस से शादी का वादा किया था लेकिन पूरा नहीं किया तो उस ने 11 सितंबर को दुष्कर्म की रिपोर्ट लिखा दी. पुलिस ने असलम को बलात्कार के आरोप में जेल भेज दिया.

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