"मौका मिला तो मैं भी अपना टैलेंट दिखा सकता हूं "चंदन राय सान्याल
Sarita|September Second 2020
 "मौका मिला तो मैं भी अपना टैलेंट दिखा सकता हूं "चंदन राय सान्याल
चंदन राय सान्याल ने अभिनय की शुरुआत थिएटर से की. सिनेमाई परदे पर वे जाने गए फिल्म 'कमीने' से. इस समय वे वैब सीरीज 'आश्रम' में अपने किरदार भोपा स्वामी से दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं. वे अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत ले कर अब तक की जर्नी को रोचक बताते हैं.
शांतिस्वरूप त्रिपाठी

भारतीय अभिनेता चंदन राय सान्याल इंग्लैंड में थिएटर कर रहे थे. उस वक्त उन के नाटकों को देखने के लिए हौलीवुड अदाकारा जूडी डेंच सहित कई बड़ीबड़ी हस्तियां आया करती थीं. उन के नाटकों के शो आस्ट्रेलिया, इटली सहित कई देशों में हो रहे थे.

एक दिन बौलीवुड निर्मातानिर्देशक विशाल भारद्वाज ने उन्हें अपनी फिल्म 'कमीने' में अभिनय करने का मौका दे दिया. फिल्म 'कमीने' को जबरदस्त सफलता मिली, चारों तरफ चंदन राय सान्याल के अभिनय की चर्चा होने लगी और फिर बहुतकुछ बदल गया. उस के बाद चंदन राय बौलीवुड में ही व्यस्त हो कर रह गए. 'कमीने' के बाद 'डी डे', 'जज्बा', 'प्राग', 'जब हैरी मेट सेजल', 'जबरिया जोड़ी' सहित कई फिल्मों के अलावा बुद्ध देव दास गुप्ता के संग बांगला फिल्में की. 'भ्रम', 'हवा बदले हसू', 'काली 2' सहित कई वैब सीरीज में अभिनय कर अपनी एक अलग पहचान बनाई. इन दिनों 'एमएक्स प्लेयर' पर प्रसारित हो रही वैब सीरीज 'आश्रम' में उन के भोपा स्वामी के किरदार को काफी पसंद किया जा रहा है.

गणित विषय से औनर्स करने के बाद अभिनय क्षेत्र में उन की दिलचस्पी कैसी जागी, जब इस बारे में उन से पूछा गया तो वे जवाब में कहते हैं, "हम बंगाली मध्यवर्गीय परिवार से हैं. बंगाल में संगीत का माहौल स्वाभाविक तौर पर रहता है. पर मेरे घर पर अभिनय का कोई माहौल नहीं था. दुर्गापूजा के दौरान होने वाले कार्यक्रम में हम अकसर नाटक में अभिनय कर लेते थे. हम दिल्ली में रहे, शिक्षा दिल्ली में ही हासिल की.

"मैं ने मैथ्स औनर्स किया. मैं एमबीए करना चाहता था, पर अचानक मेरा पाला थिएटर से पड़ गया. थिएटर करते हुए मजा आने लगा, तो उस तरफ मेरी रुचि बढ़ती ही गई. धीरेधीरे यह मेरे प्रोफैशन में बदल गया. काम करता रहा और अब फिल्म व वैब सीरीज में अभिनय करते हुए लगभग 14-15 वर्ष हो गए. इस वक्त लोग वैब सीरीज 'आश्रम' में मेरे भोपा स्वामी के किरदार की तारीफ कर रहे हैं."

अपने चर्चित नाटकों के बारे में चंदन राय कहते हैं, "मोहन राकेश का 'आषाढ़ का एक दिन', विजय तेंदुलकर का 'सखाराम बाइंडर', 'राइज एंड फाल औफ शेक्सपियर, 'मुद्रा राक्षस', 'चरणदास चोर', असगर वजाहत का 'जिस लाहौर नई देख्या, ओ जम्याई नई', 'वेटिंग फौर गोडो' के अलावा कुछ संस्कृत के नाटक भी किए हैं. जरमन लेखक मार्क्स फ्रिस्क का नाटक 'अंडोरा' भी किया.

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