मिक्स्ड कल्चर की महिलाओं से घबराए कट्टरवादी
Sarita|September First 2020
मिक्स्ड कल्चर की महिलाओं से घबराए कट्टरवादी
अमेरिका में कट्टरवाद का सामना कर रहीं कमला हैरिस दुनिया की अकेली महिला नहीं हैं. हमारे देश भारत में भी ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं जो बताते हैं कि भिन्न पृष्ठभूमि वाले कपल्स और उन की संतानों को प्रताड़ित व हतोत्साहित करने के लिए कैसे कैसे धार्मिक हथकंडे अपनाए जाते हैं.
भारत भूषण श्रीवास्तव

'मेरी मां यह अच्छी तरह जानती थीं कि वे 2 ब्लैक बेटियों को बड़ा कर रही थीं. उन्हें पता था कि उन्होंने जिस देश को रहने के लिए चुना है वह माया और मुझे ब्लैक लड़कियों के तौर पर ही देखेगा, लेकिन वे इस बात को ले कर दृढ़ थीं कि वे अपनी बेटियों की परवरिश इस तरह करेंगी कि वे आत्मविश्वासी ब्लैक महिला के तौर पर दुनिया के सामने आएं.'

भारतीय मूल की अमेरिकी सिटिजन कमला हैरिस ने साल 2018 में रिलीज की गई अपनी आत्मकथा 'द ट्रप्स वी होल्ड' में खुद से ताल्लुक रखते कई दिलचस्प खुलासे किए. उन में से अधिकांश उन के मिक्स्ड कल्चर वाले परिवार को ले कर हैं. अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद के लिए डैमोक्रेटिक पार्टी की इस अधिकृत उम्मीदवार में पूरी दुनिया की जिज्ञासा और उत्सुकता बढ़ रही है. भारतीय तो इस बात को ले कर बेहद रोमांचित हैं कि उन के देश की बेटी दुनिया के सब से ताकतवर देश अमेरिका के उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार चुनी गई है और ऐसा होना इसलिए भी स्वाभाविक है कि कमला हैरिस की उम्मीदवारी से रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार व मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास लड़खड़ा गया है.

यह लड़खड़ाया आत्मविश्वास ट्रंप के उस बयान से समझ आया जिस में उन्होंने बड़ी बेबसी, खीझ और खिसियाहट से कहा कि अगर राष्ट्रपति पद के डैमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन जीत गए तो कमला उन की 'बौस' होंगी और अमेरिका पर चीन की चलेगी. धीरेधीरे यह चुनावप्रचार घटिया स्तर पर आ रहा है और हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर कट्टरवादी व सनकी ट्रंप कोई छिछोरी टिप्पणी कर डालें. यह बात कभी किसी सुबूत की मुहताज नहीं रही कि ट्रंप के दिलोदिमाग में अश्वेतों के लिए समानता या सहानुभूति का कोई भाव नहीं है बल्कि नफरत इफरात से भरी है. कमला हैरिस की उम्मीदवारी से वे बेइंतहा बौखलाए हुए हैं क्योंकि उन के चलते अश्वेत, खासतौर से 13 लाख भारतीय, वोट उन्हें हाथ से खिसकते दिखाई दे रहे हैं.

ट्रंप की बौखलाहट देख साफ लग रहा है कि अगर कमला हैरिस की जगह कोई श्वेत उम्मीदवार होता तो उन की मुसीबतें कम बढ़ती लेकिन अब नजारा उलट है जिस के नतीजे के लिए 3 नवंबर का इंतजार करना होगा. लेकिन यह बात सोचने लायक है कि कमला में ऐसा क्या खास है और क्यों है जिस के चलते चुनाव का रोमांच दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है और वे लगातार लोकप्रिय होती जा रही हैं. अपने प्रचार अभियान में वे अपने मिश्रित परिवार को प्राथमिकता में रखती हैं. वे गर्व से खुद को भारतीय और भिन्न पृष्ठभूमि का और विविधता को लोकतंत्र कहने से चूकती नहीं. इस से ट्रंप की मुश्किलें और बढ़ती हैं.

एक मिक्स्ड कल्चर फैमिली

55 वर्षीय कमला अमेरिका के कैलिफोर्निया में जन्मी थीं. उन की मां श्यामला गोपालन 19 साल की उम्र में चेन्नई से अमेरिका डाक्टरी की पढ़ाई करने चली गई थीं. वहां उन की पहचान कैंसर शोधकर्ता की बनी. प्रतिभाशाली श्यामला ने महज 25 साल की उम्र में ही पीएचडी कर ली थी. इस के बाद उन की मुलाकात जमैका के ईसाई युवक डोनाल्ड हैरिस से हुई जो अर्थशास्त्र से पीएचडी कर रहे थे. 50 के दशक में अमेरिका में सिविल राइट्स मूवमैंट शबाब पर था. अश्वेत छात्र होने के नाते श्यामला और डोनाल्ड दोनों सक्रिय रूप से इस आंदोलन से जुड़े थे. दोनों में प्यार हुआ और शादी भी उन्होंने कर ली. हालांकि श्यामला के लिए किसी अफ्रीकी से शादी करने का फैसला आसान नहीं था क्योंकि वे तमिल ब्राह्मण थीं लेकिन अच्छी बात यह है कि वे कट्टर नहीं थीं.

शादी के बाद इस कपल को 2 बेटियां हुईं जिन के नाम माया और कमला रखे गए. इन दोनों की परवरिश अलग संस्कृति और परंपराओं के बीच हुई. इन दोनों की मित्रमंडली भी कालों की थी. यह परिवार ब्लैक बैपिस्ट चर्च भी जाता था और हिंदू मंदिरों में भी जाता था. अपने कुछ साक्षात्कारों में कमला काफी पहले स्वीकार चुकी हैं कि इस मिक्स्ड कल्चर में उन्हें अटपटा कुछ नहीं लगता था लेकिन कटाक्षों का सामना हर कभी करना पड़ता था. इस दौरान वे पिता के घर जमैका और मां के घर भारत भी आती थीं. श्यामला के पिता पी वी गोपालन एक फ्रीडम फाइटर थे जिन का पैतृक गांव तमिलनाडु के तिरुवरुर जिले में है.

श्यामला और डोनाल्ड में ज्यादा निभ नहीं पाई और दोनों ने तलाक का फैसला ले लिया. उस वक्त कमला की उम्र महज 7 साल की थी. यह तलाक देखा जाए तो एक तात्कालिक आवेश का नतीजा था. इन दोनों में धर्म और राष्ट्रीयता तो दूर की बात है, किसी तरह के वैचारिक मतभेद भी नहीं थे. झगड़ा घर में रखी बेशुमार किताबों को ले कर हुआ था. दोनों ने परस्पर सहमति से अलग होने का फैसला ले लिया.

articleRead

You can read up to 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories, newspapers and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

September First 2020