कैसे शुरू होगी फिल्मों की शूटिंग
Sarita|September First 2020
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कैसे शुरू होगी फिल्मों की शूटिंग
देश कोरोना महामारी के चलते काफी दिक्कत झेल चुका है. इस झटके से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भी अछूती नहीं रही जहां कई शोज और फिल्म की शूटिंग अधर में लटकी पड़ी हैं. कई निर्माता, कलाकार, स्टाफवर्कर कोरोना और आर्थिक मार दोनों झेल रहे हैं.
शांतिस्वरूप त्रिपाठी

कोरोना महामारी के फैलते ही 17 मार्च से फिल्मों और टीवी सीरियलों की शूटिंग बंद कर दी गई थी. उस के बाद सरकार ने 25 मार्च से लौकडाउन लागू कर दिया. जून माह से केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को थोड़ी सी छूट देते हुए धीरेधीरे कामकाज शुरू करने की इजाजत दी, ताकि धराशायी हो चुकी अर्थव्यवस्था को फिर से गति मिल सके. परिणामस्वरूप महाराष्ट्र सरकार ने 'मिशन बिगिन अगेन' के तहत कई तरह के नियमों के साथ उद्योगधंधों को शुरू करने के साथ ही फिल्म, टीवी सीरियल और वैब सीरीज की शूटिंग शुरू करने का स्टैंडर्ड औपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) 31 मई को जारी कर दिया. मगर महाराष्ट्र सरकार यह भूल गई कि फिल्म इंडस्ट्री और दूसरी इंडस्ट्री की कार्यशैली में जमीनआसमान का अंतर है. राशन, दूध या अन्य दुकानें खोलना सहज है, जहां पर कोरोना से सुरक्षा के उपायों के तहत चेहरे पर मास्क लगाने के साथसाथ 2 गज की दूरी रखी जा सकती है.

मगर फिल्म, टीवी सीरियल और वैब सीरीज की शूटिंग मास्क लगा कर व 2 गज की दूरी के नियम के साथ कतई संभव नहीं है. फिल्म, टीवी सीरियल व वैब सीरीज की शूटिंग के दौरान सैट पर काफी लोगों का जमावड़ा होता है. कलाकार का मेकअप करने वाला इंसान दो गज की दूरी से उस का मेकअप नहीं कर सकता. मेकअप के दौरान या कैमरे के सामने अभिनय करते हुए चेहरे पर मास्क नहीं लगाया जा सकता. कलाकारों के हेयरड्रैसर के लिए भी दो गज की दूरी बरकरार रखते हुए काम करना संभव नहीं होता. कैमरे के सामने 80 प्रतिशत दृश्यों में 2 कलाकारों के बीच दूरी रखना, मास्क लगाना और एकदूसरे को न छूना संभव ही नहीं. इसी वजह से अभी तक फिल्मों की शूटिंग शुरू नहीं हो पाई है.

इस संदर्भ में पिछले 28 वर्षों से फिल्म, थिएटर, टीवी सीरियल, वैब सीरीज में अभिनय करते आ रहे अभिनेता दयाशंकर पांडे का बयान काफी माने रखता है. वे कहते हैं, "मेरी राय में कोरोना महामारी का जो असर पूरे विश्व में नजर आ रहा है, उस के चलते कलाकार पहला सैनिक होगा, जो अभिनय करते हुए मौत के मुंह में समा सकता है. देखिए, दुकान खोल कर सामान बेचना, किसी फैक्ट्री में काम करना, यहां तक कि देश की सीमा पर दुश्मनों से लड़ रहा सैनिक भी मुंह पर मास्क बांध कर, अपने हथियारों को सैनिटाइज कर दुश्मनों पर गोली चला सकता है. मगर, एक कलाकार के लिए कैमरे के सामने मास्क लगा कर अभिनय करना संभव ही नहीं."

टीवी सीरियलों की शूटिंग शुरू?

महाराष्ट्र सरकार द्वारा 31 मई और 23 जून को शूटिंग करने के संशोधित एसओपी के बावजूद, फिल्मों की शूटिंग अभी तक शुरू नहीं हो पाई है. मगर ब्रोडकास्टर यानी कि सैटेलाइट टीवी चैनलों के दबाव के चलते 25 जून से टीवी सीरियलों की शूटिंग जरूर शुरू हो गई थी और हो भी रही है. वास्तव में लौकडाउन के 4 माह के दौरान सैटेलाइट चैनलों पर हर सीरियल के पुराने एपिसोड दोहराए जाने से दर्शकों ने सैटेलाइट चैनलों से दूरी बना ली थी. वहीं, दूरदर्शन ने 30 वर्ष पहले प्रसारित हो चुके 'रामायण', 'महाभारत', 'चाणक्य', 'विष्णु पुराण', 'श्री कृष्ण', 'उपनिषद गंगा' जैसे सीरियलों का प्रसारण कर दर्शकों को अपनी तरफ खींच लिया था.

कुछ दर्शक ओटीटी प्लेटफौर्स की तरफ मुड़ गए थे. इस से सैटेलाइट चैनल के मालिक यानी कि ब्रोडकास्टरों में हड़कंप मच गया था. इस के बाद ब्रोडकास्टरों ने ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर उन पर और सीरियल निर्माताओं पर दबाव बना कर 25 जून से टीवी सीरियलों की शूटिंग शुरू करवा दी. सीरियल के कलाकारों ने भी कोरोना महामारी के डर के बावजूद शूटिंग करनी शुरू कर दी. कलाकारों व वर्करों ने अपनी तरफ से मास्क, सैनिटाइजर आदि का उपयोग करते हुए काम करना शुरू किया. सभी मानते हैं कि काम तो करना ही पड़ेगा.

शूटिंग के दुष्परिणाम

टीवी सीरियलों की शूटिंग शुरू होने के पीछे ब्रोडकास्टरों की अपनी व्यावसायिक मजबूरी है. किसी को भी बौलीवुड के वर्करों की फिक्र नहीं है, यह एक कटु सत्य है. अन्यथा हर ब्रोडकास्टर और सीरियल निर्माता शूटिंग के दौरान फूंकफूंक कर कदम बढ़ाता. उसी हिसाब से सुरक्षा के कड़क मानदंड अपनाता.

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