"लोग 2018 के नतीजों से दुखी थे, उसे सुधारेंगे"
Outlook Hindi|November 02, 2020
"लोग 2018 के नतीजों से दुखी थे, उसे सुधारेंगे"
मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव आम चुनावों से भी अहम हैं क्योंकि सरकार का टिकना या गिरना इन्हीं नतीजों पर निर्भर है।

यही नहीं, इन चुनावी नतीजों पर भाजपा की समूची रणनीति और कांग्रेस से टूटकर पार्टी में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजनीति भी दांव पर लगी हुई है। उधर, कांग्रेस की राजनीति भी दांव पर है। सो, दोनों ही अपनी पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो मार्च 2020 में सत्ता संभालने के साथ ही अपना अभियान शुरू कर दिया था। चुनाव की तारीखें तय होने तक वे उपचुनाव की सभी सीटों का दौरा कर चुके थे। प्रचार अभियान की औपचारिक शुरुआत के बाद वे फिर मोर्चे पर डट गए हैं। इसी चुनावी हलचल के बीच उन्होंने आउटलुक के शमशेर सिंह के साथ राय साझा की। प्रमुख अंशः

उपचुनावों में लोग किस आधार पर वोट करेंगे? आपके अनुसार असल मुद्दे क्या हैं?

भारतीय जनता पार्टी का एक ही एजेंडा होता है, किसान, गरीब, मजदूर, युवा तथा आम आदमी के जीवन से दुख-दर्द को दूर कर प्रदेश का विकास करना। भाजपा इसी को अपना ध्येय वाक्य मानती है और इसे पूरा करने का संकल्प करती है। हम कांग्रेस की तरह झूठ-फरेब की राजनीति नहीं करते। हम जो कहते हैं, उसे हर हाल में पूरा करते हैं। कांग्रेस की तरह झूठे सपने दिखाना भाजपा के चरित्र में नहीं। सत्ता के लालच में कांग्रेस ने 10 दिनों में किसानों का कर्ज माफ करने की बात कह दी, लेकिन 15 महीने सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने किसानों की सुध नहीं ली।

कांग्रेस का कहना है, आपने पिछले पंद्रह साल में कुछ नहीं किया। वह प्रचार कर रही है कि लोग उनके पंद्रह महीनों की तुलना आपके पंद्रह साल से करें और वोट देने का फैसला करें।

प्रदेश की जनता ने भाजपा के 15 साल के शासन को भी देखा है और कांग्रेस के 15 महीने के शासन को भी। अब छह महीने से मेरी सरकार को भी देख रही है। यह उनके ऊपर है कि वे किस आधार पर वोट दें। जहां तक मेरा सवाल है, तो अपने पिछले कार्यकाल में मैंने जनकल्याण की कई योजनाएं चलाईं और जनता, खासकर वंचित तथा अंतिम छोर के व्यक्ति की खुशहाली के लिए काम किया। हमेशा उनके पास जाकर उनके दुख-दर्द दूर करने की कोशिश करता रहा। अब भी कर रहा हूं। मैंने 23 मार्च की रात 9 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और वहां से सीधे मंत्रालय गया और काम करना शुरू कर दिया। कांग्रेस सरकार ने मेरी जिन जन कल्याणकारी योजनाओं को बंद कर दिया था, उसे न सिर्फ दोबारा शुरू किया बल्कि छात्रवृत्ति, पेंशन आदि की राशि लाभार्थियों के खातों में डलवाई। किसानों को फसल बीमा की राशि दिलवाई, उनकी सम्मान निधि में इजाफा किया।

आप किसानों की कर्जमाफी को मुद्दा बनाते हैं तो कांग्रेस बिजली बिलों का मामला उठाती है। आपका क्या कहना है?

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