सुधार से ज्यादा विरोधियों पर नजर
Outlook Hindi|October 05, 2020
सुधार से ज्यादा विरोधियों पर नजर
लेटर बम के बाद संगठनात्मक बदलाव तो हुए लेकिन उसमें चुनाव जीतने से ज्यादा पार्टी असंतुष्टों को शांत करने पर जोर
पुनीत निकोलस यादव

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाने से हुई किरकिरी के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, आखिरकार संगठन में बदलाव करने के लिए मजबूर हो गई। हालांकि उन्हें ऐसा करने में एक साल लग गए। बदलाव के बाद भी कार्यकारिणी समिति में कोई आमूल-चूल परिवर्तन नहीं किया गया है। थोड़े-बहुत बदलाव से यह तो साफ है कि नेतृत्व ने न तो 23 वरिष्ठ नेताओं के मुद्दों को बहुत ज्यादा तरजीह दी है, और न ही निराश कार्यकर्ताओं में कोई जोश आने वाला है।

घंटों चली बैठक से पार्टी में सुधार का न तो कोई ब्लूप्रिंट निकला है और न ही कोई चुनावों में पार्टी के दोबारा जीत के रास्ते पर लौटने का फॉर्मूला सामने आया है। इसके उलट बदलावों से एक बार फिर नेहरू-गांधी परिवार की सर्वोच्चता साबित हुई है। यह भी साबित हो गया है कि नेतृत्व पर सवाल उठाने वाले 23 वरिष्ठ नेताओं का भविष्य भी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की दया पर ही टिका हुआ है। पूरे घटनाक्रम से एक बात और साबित हो गई है कि भले ही पार्टी की कमान संभालने में राहुल गांधी कोई जल्दी नहीं दिखा रहे हैं लेकिन पीछे से पार्टी वहीं चलाएंगे। संगठन में बदलाव के बाद सोनिया गांधी अपने इलाज के लिए राहुल गांधी के साथ अमेरिका चली गई हैं। अब दोनों अक्टूबर की शुरुआत में भारत लौटेंगे।

जाहिर है, संसद के मौजूदा सत्र के दौरान सोनिया और राहुल गांधी दोनों ही मौजूद नहीं हैं। ऐसे में नरेंद्र मोदी सरकार को कोविड के बढ़ते मामलों, चीन विवाद, गहराते आर्थिक संकट पर घेरने और विपक्षी दलों के नेताओं के साथ समन्वय बनाने की जिम्मेदारी अधीर रंजन चौधरी, गौरव गोगोई, गुलाम नबी आजाद, जयराम रमेश, दिग्विजय सिंह सहित दूसरे नेताओं के कंधे पर है। सूत्रों का कहना है सोनिया और राहुल अमेरिका से लौटने के बाद पार्टी में कई अहम बदलाव करेंगे। कार्यकारिणी समिति के तीन दर्जन से ज्यादा विभाग, सेल, समितियां और उप-समूह हैं, जो फिलहाल कुछ भी नहीं कर रहे हैं, उन सबमें बदलाव की तैयारी है। एक वरिष्ठ नेता ने आउटलुक को बताया कि "पत्र लिखने वाले नेताओं से सोनिया और राहुल किस तरह निपटने का प्लान बना रहे हैं, यह पार्टी की आंतरिक समितियों में हुए बदलावों से पता चलेगा।" असल में पत्र लिखने वाले वरिष्ठ नेताओं में ज्यादातर इन आंतरिक विभागों, समितियों आदि के या तो प्रमुख हैं या फिर सदस्य हैं।

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October 05, 2020