'क्वीन' राजनीति
Outlook Hindi|October 05, 2020
'क्वीन' राजनीति
भाजपा से जुड़ाव और 'हिमाचल की बेटी' की अपनी नई पहचान के साथ क्या कंगना राजनीति में उतरने की तैयारी में? क्या यह सब तैयार पटकथा जैसा है?
अश्वनी शर्मा

नाम कमाने के लिए घर छोड़ने वाली कंगना रनौत की अपने गृह प्रदेश हिमाचल वापसी 'हिमाचल की बेटी' की तरह हुई। अब उसके गृह प्रदेश के लोगों की निगाहें यह तलाश रही हैं कि क्या 'बॉलीवुड अभिनेत्री' का तमगा लंबे वक्त तक उसके साथ रह पाएगा? क्या कंगना राजनैतिक भूमिका के लिए तैयार है? बेशक, सुशांत सिंह राजपूत मसले से कंगना ने खुद को ऊंचे हलके में स्थापित कर लिया है।

कंगना ने शिवसेना सरकार से सीधी टक्कर ली है। मुंबई में उसके बाहरी होने, हिमाचली के रूप में उसकी क्षेत्रीय पहचान और भाजपा से उसकी नजदीकी ने अतिरिक्त ध्यान खींचा। उसके लिए यह सारी स्थितियां थाली में परोसे गए अगले कदम की तरह है। उसका मीडिया प्रोफाइल शानदार है। वह, तेज, आक्रामक और मुखर है। ये सारी बातें उसके लिए खजाने की तरह है। कंगना कभी भी विवादों से दूर नहीं रही। उसने खुद को हमेशा ही अलग दिखाया। चाहे फिर वह बॉलीवुड की शक्तिशाली लॉबी से लोहा लेना ही क्यों न हो। भाई-भतीजावाद और "मूवी माफिया" के खिलाफ उसका रुख बिल्कुल वही है, जो अब एक और 'बाहरी व्यक्ति' सुशांत मामले की बहस में बदल गया है। लेकिन केंद्र सरकार से वाइ श्रेणी की सुरक्षा और मुंबई में उसके ऑफिस को तोड़ दिए जाने की घटना ने उसे इस बहस से कहीं आगे कर दिया है। साफ दिख रहा है कि उसके हाथ में भाजपा की तलवार है।

शांत हिमालय से लेकर बॉलीवुड तक उसकी यात्रा सिर्फ एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक केवल एक शानदार छलांग है। उसका परिवार मंडी जिले के राजपूत बहुल गांव भांबला से आता है। एक कॉलेज में प्राध्यापक और कंगना की पड़ोसी शशि शर्मा कहती हैं, "कोई भी कल्पना नहीं कर सकता कि साधारण परिवार में जन्मी घरेलू-सी दिखने वाली लड़की सफलता की ऐसी सीढ़ी चढ़ेगी। उनका परिवार बहुत पैसे वाला भी नहीं है। डीएवी स्कूल चंडीगढ़ में पढ़ते हुए जब उसने, मॉडलिंग करने की इच्छा जाहिर की तो परिवार ने सहयोग करने से साफ मना कर दिया था। उसने विद्रोह किया और फिर क्या हुआ सब जानते हैं।"

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October 05, 2020