गर्त में रोशनी की खोज
Outlook Hindi|October 05, 2020
गर्त में रोशनी की खोज
अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा संकट में, एकमात्र सहारा सरकार का खर्च बजट लक्ष्य से भी पीछे
एस.के. सिंह

अप्रैल से जून के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 23.9 फीसदी घटने के बाद तमाम एजेंसियां भले सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर के सालाना अनुमान में कटौती कर रही हों, वित्त मंत्रालय और मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम का मानना है कि अर्थव्यवस्था में वी-शेप यानी तेज रिकवरी हो रही है। चुनिंदा आंकड़ों को देखें तो उनकी बात सही लगती है। अगस्त में यात्री वाहनों की बिक्री 14 फीसदी बढ़ी है। मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 52.2 रही, लॉकडाउन के बाद यह पहली बार 50 से ऊपर (यानी ग्रोथ) दर्ज हुई। ई-वे बिल जुलाई में एक साल पहले की तुलना में 97 फीसदी पहुंच गए। टोल संग्रह भी बढ़ा है।

लेकिन यह स्थिति हर सेक्टर में नहीं हैं। अर्थव्यवस्था में 53 फीसदी योगदान करने वाला सर्विस सेक्टर बुरी तरह प्रभावित है। एयरलाइंस, होटल, रिटेल और रियल एस्टेट जैसे बड़े रोजगार देने वाले सेक्टर अभी तक मांग में कमी से जूझ रहे हैं। नेशनल रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार पांच महीने में 30 फीसदी से ज्यादा रेस्तरां और बार स्थायी रूप से बंद हो गए हैं। जुलाई के मुकाबले अगस्त में बिजली की खपत में गिरावट आई है। ज्यादातर एमएसएमई की स्थिति भी अलग नहीं है। पहले देशव्यापी और फिर राज्य स्तरीय लॉकडाउन से इनका कारोबार चौपट हो गया।

अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी का आकार घटने यानी विकास दर निगेटिव रहने का अंदेशा तो सबको था, लेकिन 23.9 फीसदी गिरावट ने अनेक अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों को चौंका दिया। पहले वे मान रहे थे कि तीसरी और चौथी तिमाही में विकास दर शून्य से ऊपर यानी पॉजिटिव हो जाए, लेकिन अब उन्हें ऐसा नहीं लगता। इसलिए उन्होंने सालाना विकास दर का अनुमान घटाना शुरू कर दिया है। संशोधित अनुमान में अमेरिका, चीन और ब्राजील के साथ वैश्विक विकास में तो बेहतरी की उम्मीद है, लेकिन भारत की स्थिति और खराब होने का अंदेशा है। (देखें टेबल) आइएमएफ का कहना है कि बड़े देशों में सबसे ज्यादा भारत की अर्थव्यवस्था ही प्रभावित हुई है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार 60 देशों की जीडीपी में पहली तिमाही के दौरान औसतन 12 फीसदी गिरावट आई, जबकि भारत में यह दोगुनी है।

पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों से पता चलता है कि कृषि को छोड़ बाकी सभी सेक्टर में गिरावट आई। कृषि की विकास दर 3.4 फीसदी रही जबकि मैन्युफैक्चरिंग में उत्पादन 39.3 फीसदी, कंस्ट्रक्शन में 50.3, ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट और संचार में 43 फीसदी घट गया। मौजूदा हालात की बात करें तो जिस तरह रोजाना कोविड से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या एक लाख के आसपास पहुंच गई है, उसे देखते हुए सर्विस सेक्टर की स्थिति जल्दी सुधरने वाली नहीं लगती। होटल, ट्रांसपोर्ट, पर्यटन और मनोरंजन जैसे सेक्टर या तो लॉकडाउन का सामना कर रहे हैं या उनमें डिमांड नहीं है। उदाहरण के तौर पर, स्कूलकॉलेज बंद रहने से इनसे जुड़े ट्रांसपोर्ट का 1.2 लाख करोड़ रुपये का बिजनेस ठप पड़ा है। अगस्त में जीडीपी का नौ फीसदी हिस्सा या तो लॉकडाउन का सामना कर रहा था या महामारी के डर से उनमें गतिविधियां बंद थीं।

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October 05, 2020