दो शहरों की दास्तां

Outlook Hindi|July 13, 2020

We're offering this story for free to read so that you can stay updated on the COVID-19 outbreak
दो शहरों की दास्तां
महामारी की तेजी मुंबई में घटी लेकिन दिल्ली में संक्रमण मामले देश में सबसे अधिक हुए, क्या है फर्क
हरिमोहन मिश्र

महामारी की गति देख ऐसा लगता है कि मानो कोरोनावायरस आधुनिक ताकत और इंतजामात पर इतराने वाले शिखर केंद्रों का इम्तहान ले रहा है। चीन के अहम औद्योगिक केंद्र और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के राज में बेहद सराहे वुहान की कथित तौर पर सबसे पहले परीक्षा लेने वाला कोविड-19 अब बीजिंग में उसकी राजनैतिक पीठ में धावा बोल चुका है। फिर दुनिया भर के ताकतवरों अमेरिका, इटली, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, ब्राजील, जापान, रूस और तमाम देशों के आधुनिक सत्ता केंद्रों में सबसे अधिक आक्रामक रुख के साथ प्रकट हुआ और कई जगह उसकी आक्रामकता अब भी जारी है। हमारे देश में भी वह सबसे पहले कथित तौर पर जनवरी के आखिरी दिनों में हवाई यात्रियों के जरिए पहुंचा तो धुर दक्षिण के केरल में, लेकिन थोड़े ही दिनों में मौजूदा वक्त के ताकत के केंद्रों अहमदाबाद, मुंबई और दिल्ली में विकराल रूप दिखाने लगा। तो, मुद्दा यही नहीं है कि अनजान बीमारी की काट के उपाय ढूंढ़ने में वक्त लगता है, बल्कि सवाल यह है कि मौजूदा वक्त के तमाम इंतजामात-स्वास्थ्य ढांचा, समाज व्यवस्था, अर्थव्यवस्था-सभी इतनी जल्दी पस्त क्यों हो गए?

यह भी सही है कि जिन देशों या अपने देश में भी जिन राज्यों, मसलन केरल, में आधुनिक स्वास्थ्य ढांचे के बनिस्बत सामुदायिक सहयोग पर आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा है, वहां संक्रमण पर अपेक्षाकृत कम क्षति के साथ काबू पा लिया गया। हमारे दो सबसे अहम महानगरों मुंबई और दिल्ली की दास्तान भी यही संकेत देती है, जिनमें एक वित्तीय राजधानी कही जाती है तो दूसरी राजनैतिक ताकत की पीठ है। ये दोनों अपने विकास, स्वास्थ्य और तमाम ढांचे पर इतराते हैं। यहीं नब्बे के दशक के बाद सबसे अधिक उदारीकरण और निजी क्षेत्र बढ़ा है।

articleRead

You can read up to 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

July 13, 2020