बॉयकॉट कितना मुफीद

Outlook Hindi|July 13, 2020

बॉयकॉट कितना मुफीद
चीन का 30 फीसदी आयात ही रोकना संभव, पूरी तरह बहिष्कार कम से कम अभी व्यावहारिक नहीं लगता
सैबल दासगुप्ता, लोला नायर और ज्योतिका सूद

करीब छह करोड़ व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने नया अभियान छेड़ दिया है 'भारतीय सामान-हमारा गौरव' ।इसका उद्देश्य चीन में बने सामान का बहिष्कार तेज करना और हां, उन्हें भारत में ही बनाना है। उसने 500 श्रेणियों और 3000 उत्पादों (खिलौनों से फैब्रिक, किचनवेयर से लेकर कॉस्मेटिक सामान तक की सूची बनाई है, जिन्हें देश में स्थानीय निर्माता आसानी से बना सकते हैं। इस अभियान का उद्देश्य दिसंबर 2021 तक 13 अरब डॉलर मूल्य के चीन के उत्पादों का स्थानीय विकल्प तैयार करना है। लेकिन जरा इस पर गौर करिए। कैट के महत्वाकांक्षी अभियान के दायरे में आने वाले सामान 2017-18 में चीन से 70 अरब डॉलर के कुल आयात के पांचवें हिस्से से भी कम हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, हकीकत यही है कि अगर 'बॉयकाट चीन' के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक आत्मनिर्भरता और आत्मनिर्भर भारत की अपील को जोड़ना है, तब भी 30 फीसदी चीन से आयात या कैट के लक्ष्य से थोड़े ज्यादा को ही रोक पाना संभव हो पाएगा। देश के पास चीन के आयात से पूरी तरह छुटकारा पाना मुमकिन नहीं होगा। फिर दोनों पड़ोसी देशों में एक-दूसरे के भारी निवेश की तो बात ही अलग है।

द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों को हल्के-फुल्के ढंग से नहीं लिया जा सकता है।भले आयात राष्ट्रवादी भावनाओं को उफान देने के लिए ज्यादा खटक सकता है, लेकिन इसे समग्रता में देखा जाना चाहिए। चीन महत्वपूर्ण मशीनरी बेचता है जिससे घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग और निर्यात को बढ़ावा मिलता है। इसका विकल्प तैयार करने में पांच से दस साल लग सकते हैं। दोनों ही देशों ने एक-दूसरे के यहां भारी निवेश किया है। यहां चीन की कंपनियों और भारतीय शेयर बाजारों में वहां के निवेशकों को भारत छोड़कर जाने के लिए कोई नहीं कह सकता है। ऐसे ही चीन में भारतीय कंपनियों से बाहर जाने को नहीं कहा जा सकता है।

मोटे आकलन से पता चलता है कि चीन से करीब एक-तिहाई आयात लो-टेक गुड्स का होता है जो पहले भारत में बनते रहे हैं या आज भी कुछ कम मात्रा में बनते हैं। इस आयात को तो कम किया जा सकता है और स्थानीय उत्पादों और ब्रांडों को बढ़ावा दिया जा सकता है। ऐसी कोशिश से देश की सैकड़ों छोटी और मझोली कंपनियों को भी मदद मिलेगी, जो इस समय कमजोर मांग के कारण खस्ताहाली का शिकार हैं। एमएसएमई सेक्टर में विकास तेज होता है तो समूचे मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा और 'मेक इन इंडिया' को फायदा मिलेगा।

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July 13, 2020