रिश्ते बचाने की दरकार

Outlook Hindi|June 15, 2020

रिश्ते बचाने की दरकार
लिपू लेख दर्रे पर नेपाल के हाल के रुख पर चीन की स्पष्ट छाप, भारत को पड़ोसी देश के साथ ऐतिहासिक रिश्ते बचाने को प्रयास करने होंगे
प्रणय शर्मा

पिछले कुछ हफ्तों में भारत-नेपाल के रिश्तों में तनाव पैदा करने वाली और द्विपक्षीय संबंधों में खटास लाने वाली घटनाओं के केंद्र में रहा सीमा विवाद कोई नया मुद्दा नहीं है। पहले भी यह मुद्दा कई बार दोनों देशों के बीच रिश्तों के लिए चुनौती बना, लेकिन कभी भी इतना गंभीर नहीं हुआ कि हमारे ऐतिहासिक रिश्तों पर भारी पड़े। इसी वजह से अटकलें लग रही हैं कि यह बिलकुल अलग मामला हो सकता है। इस मुद्दे को नेपाल में लगातार प्रभाव बढ़ा रहे चीन के संदर्भ में भी देखना होगा। सीमा विवाद के मूल में दोनों देशों की सीमा का विभाजन करती महाकाली नदी है। 1816 के सुगौली समझौते के अनुसार, इस नदी, जिसे नेपाल में काली के नाम से भी जाना जाता है, के उद्गम स्थल, के पूर्व का हिस्सा नेपाल और पश्चिम का हिस्सा भारत की सीमा में है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच महाकाली नदी के उद्गम स्थल को लेकर मतभेद है। नेपाल दावा करता है कि यह नदी लिंपियाधुरा से निकलती है, इसलिए लिपू लेख पास महाकाली के पूर्व का पूरा हिस्सा उसका है। लेकिन भारत का तर्क है कि इस नदी का उद्गम इस स्थान पर नहीं है, इसलिए लिपू लेख उसके राज्य उत्तराखंड में आता है।

लिपू लेख पास और इस क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत इस वजह से बढ़ जाती है कि इस रास्ते से न सिर्फ चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आने वाले कैलाश मानसरोवर की यात्रा का मार्ग काफी छोटा है, बल्कि भारत चीन के साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के निकट पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रख सकता है।

गौरतलब है कि पिछले 10 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाली पीएम कृष्ण प्रसाद शर्मा ओली के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत में यह मुद्दा बिलकुल नहीं उठा। दोनों नेताओं का रुख काफी दोस्ताना रहा और सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई। इस वार्ता का फोकस इस क्षेत्र में गंभीर संकट बनकर उभरे कोविड-19 और इसके कारण आर्थिक और अन्य गतिविधियों में आ रही दिक्कतों से निपटने पर था।

दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच सहमति बनी कि सीमा पार आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई सुगम रहनी चाहिए। उनके बीच भारत-नेपाल सीमा पर भटक रहे लोगों को जल्द से जल्द घर पहुंचाने के लिए व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।

इस बात का तनिक भी आभास नहीं था कि जल्दी ही दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीमा के मुद्दे पर मतभेद इतने बढ़ जाएंगे कि चंद हफ्तों में यह दूसरे सभी मुद्दों पर हावी हो जाएगा। भारत- नेपाल के रिश्तों में ऐसा क्या हुआ जिसके कारण ऐतिहासिक संबंध टूटने के कगार पर पहुंच गए।

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June 15, 2020