पैकेज में काम का खास नहीं

Outlook Hindi|June 15, 2020

पैकेज में काम का खास नहीं
छोटे-मझोले उद्यमियों ने बिना कोलेटरल वाले महंगे कर्ज को नकारा, पुराने कर्ज पर चाहते हैं ब्याज माफी
हरीश मानव

आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत केंद्र सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) के लिए तीन लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) की घोषणा की है, जो एक जून से लागू होगी। कोलेटरल फ्री यानी बगैर गिरवी या गारंटी वाली इस लोन स्कीम को ज्यादातर एमएसएमई ने सिरे से नकार दिया है। उनका कहना है कि दो महीने से अधिक के लॉकडाउन में ठप कारोबार के चलते उनके पास श्रमिकों को अप्रैल और मई का वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं। वे किसी भी सूरत में कोलेटरल फ्री कर्ज से वेतन नहीं देंगे। पहले ही 29 लाख करोड़ रुपये के कर्ज तले दबे एमएसएमई आशंकित हैं कि लॉकडाउन में उनका धंधा जितनी बुरी तरह तबाह हुआ है, अगले एक साल में भी सामान्य हो पाएगा या नहीं। इसलिए उद्ममी नए कर्ज का जोखिम लेना नहीं चाहते। इनका कहना है कि कारोबार को पटरी पर लाने के लिए उन्हें बैंकों से 9.25 फीसदी ब्याज पर नया महंगा कर्ज नहीं, बल्कि पुराने कर्ज पर ब्याज माफी चाहिए।

उद्यमी कर्ज पैकेज को छलावा बता रहे हैं।उनका कहना है कि वर्किंग कैपिटल पर ब्याज माफी जैसा राहत का कोई ठोस कदम सरकार ने नहीं उठाया है। वे इस पसोपेश में हैं कि सरकार की गारंटी वाला तीन लाख करोड़ रुपये का कर्ज कितना फायदेमंद होगा। 23 मई को बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निर्देश दिए कि वे उसी यानी सीबीआई, सीवीसी और सीएजी से घबराए बगैर एमएसएमई को कर्ज दें। वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कोलेटरल फ्री कर्ज के फैसले से लोन एनपीए हुआ तो किसी भी बैंक अधिकारी या बैंक को दोषी नहीं ठहराया जाएगा।

दरअसल, एमएसएमई सेक्टर में पहले से ही बढ़े एनपीए से घबराए बैंकों ने पिछले एक साल से इनके कर्ज में सिर्फ 0.7 फीसदी की बढ़ोतरी की है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मुताबिक, मार्च 2020 तक एमएसएमई सेक्टर में 29 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में से 10 फीसदी एनपीए है। बैंक ऑफ बड़ौदा के एमडी एवं सीईओ संजीव चड्ढा का कहना है, "सरकारी लोन गारंटी योजना तहत हमारा बैंक एमएसएमई को इस वित्त वर्ष में 12,000 करोड़ रुपये के कर्ज दे सकता है।"

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June 15, 2020