कोरोना काल में हुए बेसहारा

Outlook Hindi|June 15, 2020

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कोरोना काल में हुए बेसहारा
तीन महीने बाद भी मुआवजा नहीं, दंगा पीड़ितों का दोहरा संकट
के. के. कुलश्रेष्ठ

उत्तर-पूर्व दिल्ली के शिव विहार में रहने वाली रुबीना बेगम और उनके पति जावेद बच्चों के साथ जले घर में रहने को मजबूर हैं क्योंकि उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। वह अपने घर की रंगाई-पुताई और मरम्मत भी नहीं करवा सकती हैं। उन्होंने सफाई करके दो-तीन बल्ब लगाकर अपने घर को रहने योग्य बनाया। लेकिन जलने की गंध उन्हें हर क्षण परेशान करती है और दंगों की याद दिलाती है। बल्ब भी घर की दीवारों और छत पर लगी कालिख छिपाने में नाकाम दिखाई देते हैं। इसी तरह मोहम्मद अख्तर के भी तीन मंजिला घर में आग लगा दी गई थी और सोने-चांदी के जेवरात और 14 भैंसें चुरा ली गई थीं। अख्तर को दस लाख रुपये का नुकसान हुआ। लेकिन उन्हें सिर्फ 50 हजार रुपये मुआवजा मिला है। बाकी मुआवजे के लिए वह पिछले दो-ढाई माह से इंतजार कर रहे हैं। 18 गज के घर में रहने वाले शेरू की रजाई-गद्दे की दुकान को दंगाइयों ने जला दिया था। शेरू को करीब पांच लाख का नुकसान हुआ लेकिन 25 हजार रुपये के अलावा उन्हें और कोई मदद सरकार से नहीं मिली।

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June 15, 2020