महामारी को मात

Outlook Hindi|June 15, 2020

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महामारी को मात
केंद्र के दिशानिर्देशों से बहुत पहले केरल ने अपनाया डब्ल्यूएचओ का ‘टेस्ट, आइसोलेट एंड ट्रेस' प्रोटोकॉल
एस.के. सिंह

जनवरी की 27 तारीख को चीन के वुहान से एक मेडिकल छात्र केरल पहुंचा, वह केरल ही नहीं बल्कि पूरे भारत का पहला कोविड-19 संक्रमित था। करीब दो महीने बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को जब पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा की, तब सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित केरल में ही थे। उस दिन पूरे देश के 564 मामलों में से केरल में 107 और दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र में 101 थे। दो महीने के लॉकडाउन और पहला केस सामने आने के चार महीने बाद केरल में संक्रमित लोगों का आंकड़ा (25 मई तक) 896 तक ही पहुंचा, जबकि महाराष्ट्र में यह संख्या 52,667 हो गई। केरल में अब तक कोरोना संक्रमित पांच लोगों की मौत हुई है, जबकि यह महामारी महाराष्ट्र में 1,695 लोगों को शिकार बना चुकी है।

लॉकडाउन में ढील के बाद केरल में भी संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका है, पर अभी तक की लड़ाई में तो भारत का तीसरा सबसे सघन आबादी (859 व्यक्ति/वर्ग किमी) वाला यह प्रदेश महामारी को मात देने में सफल रहा है। कोविड से लड़ने का इसका तरीका 'केरल मॉडल' बन गया, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे 'सक्सेस स्टोरी' बताया है तो भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) में संक्रमण रोग विभाग के प्रमुख डॉ. रमन गंगाखेडकर ने भी इसे सबसे अच्छे मॉडल में एक माना है। केरल मॉडल की सफलता का काफी श्रेय केरल की स्वास्थ्य और समाज कल्याण मंत्री के.के. शैलजा को जाता है (आगे पढ़िए उनसे बातचीत)। श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने उन्हें पत्र लिख कर कहा भी, “आपने कर दिखाया कि संसाधन सीमित होने के बावजूद बीमारी पर प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाना संभव है।

क्या उपाय किए

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June 15, 2020