बंगबंधु जयंती पर रिश्तों की गांठ

Outlook Hindi|April 06, 2020

बंगबंधु जयंती पर रिश्तों की गांठ
भारत और बांग्लादेश अपनी मौजूदा चिंताओं को दूर कर आगे की राह तय करें, शेख मुजीबुर्रहमान को यही होगी सच्ची
श्रद्धांजलि महेंद्र वेद

दिसंबर 2019 में मैं बांग्लादेश के 'बिजॉय दिवस' का साक्षी रहा। यह क्षण मेरे लिए गंभीर दुख का कारण बना। यह वही दिन है जब 1971 में भारत और बांग्लादेश की संयुक्त सेना ने पाकिस्तान से समर्पण करा लिया था। इस यात्रा के दौरान मैं बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान के घर भी गया, जहां 15 अगस्त, 1975 को परिवार के 20 सदस्यों के साथ नए राष्ट्र के संस्थापक की हत्या कर दी गई थी।

उस 14-15 अगस्त की दरम्यानी रात, सुनियोजित साजिश के तहत बांग्लादेश सेना के मौजूदा और सेवानिवृत्त अधिकारियों का एक दल टैंक और सशस्त्र जवान धानमंडी आवासीय क्षेत्र के घर में घुस आए। पहले मुजीब की पत्नी, उनके तीन बेटों और दो बहुओं, जिनमें एक गर्भवती थी, और अन्य लोगों को मारने के बाद वे मुजीब से मुखातिब हुए, जो दूसरी मंजिल के बेडरूम से उतर रहे थे। उनसे इस्तीफा देने को कहा गया। उन्होंने इनकार किया तो फौरन गोलियों से भून दिया गया। आज भी गोलियों के निशान उस हत्याकांड की गवाही देते हैं। वहां बिखरी गुलाब की पंखुड़ियां उस क्षण की याद दिलाती हैं, जहां मुजीब रक्तरंजित हो कर गिर गए थे।

तब मैं ढाका में एक पत्रकार की हैसियत से पदस्थ था और सुबह उस दर्दनाक वारदात की रिपोर्ट लिखी थी। अब मैंने विजिटर्स बुक में हस्ताक्षर किए तो मेरे आंसू छलक आए। उस घटना को लगभग 45 साल बीत गए हैं लेकिन यादों का सिलसिला मेरी संवेदनाओं से धूमिल नहीं हुआ।

एक अन्य महत्वपूर्ण घटना की याद उस वक्त की है जब, मुजीब ने 25 मार्च, 1971 को रेडियो प्रसारण में स्वतंत्रता की घोषणा की थी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। उसके बाद पूर्वी पाकिस्तान के अधिकारियों ने ऐसा कत्लेआम शुरू किया, जिसकी दुनिया में दूसरी मिसालें नहीं मिलती। फौजी हुक्मरान जनरल याह्या खान का आदेश था, “साफ कर दो।" मुजीब को पश्चिमी पाकिस्तान की जेल में भेजा गया। लेकिन, उन्होंने आजादी की जो चिंगारी जलाई, वह जलती रही। उनके जाने के बाद जैसा बांग्लादेश बनना था, वैसा नहीं बना

लेकिन कोई दूसरा उनकी जगह नहीं ले सकता। वे वहां के राष्ट्रपिता हैं। उनके कटु आलोचकों ने भी कभी उनकी भूमिका पर सवाल नहीं उठाया। वैसे, बांग्लादेश दो परस्पर विरोधी विरासतों में बंटा हुआ है। एक मुजीब की अवामी लीग है, जिसके वे संस्थापकों में एक थे और फिलहाल उनकी बेटी, शेख हसीना वहां प्रधानमंत्री हैं।

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April 06, 2020