कोर्ट से बेखौफ रसूखदार

Outlook Hindi|February 10, 2020

कोर्ट से बेखौफ रसूखदार
हाइकोर्ट के फैसले और सरकार के आदेश के बावजूद आयुष कॉलेज छात्रों से वसूल रहे ढाई गुना ज्यादा फीस
अतुल बरतरिया

जेएनयू में फीस वृद्धि और उसके बाद छात्र आंदोलन इस समय देश में चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन उत्तराखंड के तीन हजार आयष छात्रों से जबरन वसूली जा रही ढाई गुना फीस की जानकारी कम लोगों को ही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करते हुए एक आला अफसर के आदेश पर राज्य के आयुर्वेद चिकित्सा कॉलेजों में फीस बढ़ा दी गई। छात्र इसके खिलाफ हाइकोर्ट गए, जहां फैसला उनके पक्ष में आया। जब फैसले पर अमल नहीं हुआ तो छात्र आंदोलन पर उतर आए । 62 दिनों तक चले आंदोलन के बाद सरकार ने अधिक वसूली गई फीस छात्रों को वापस करने का आदेश कॉलेजों को दिया । लेकिन बेखौफ कॉलेज प्रबंधन को तो जैसे न सरकार की परवाह है, न कोर्ट की । इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इन कॉलेजों के मालिक रसूखदार लोग हैं । इनमें नेताओं और मंत्रियों के परिजन भी शामिल हैं । एक कॉलेज बाबा रामदेव के पंतजलि का भी है ।

उत्तराखंड में आयुर्वेद चिकित्सा के 13 कॉलेज हैं, जो उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं । इनमें लगभग तीन हजार छात्र छात्राएं अध्ययनरत हैं । इनमें पढ़ाई के लिए रेगुलेटरी समिति ने सालाना 80 हजार रुपये की फीस तय कर रखी है । मौजूदा विवाद की शुरुआत 2015 में कांग्रेस की हरीश रावत सरकार के समय हुई । उस वक्त आयुष विभाग के प्रमुख सचिव ओमप्रकाश ने अपने स्तर से ही ट्यूशन फीस सालाना 2. 15 लाख रुपये करने का आदेश जारी कर दिया । कॉलेज इसी आधार पर फीस लेने लगे । इतना ही नहीं, ये कॉलेज पुस्तकालय और अन्य सुविधाओं के नाम पर लगभग 60 हजार रुपये हर साल अतिरिक्त वसूल रहे हैं । छात्रों पर पिछले सालों की फीस भी इसी दर से देने का दबाव बनाया गया । परेशान छात्र छात्राओं और अभिभावकों ने अधिकारियों और मंत्रियों से भी संपर्क किया, लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी ।

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February 10, 2020